विधायक ने भरी बारिश में दौड़ा दी बस:जैन संत ने बताया- ‘राजा’ ने कैसे छोड़ा मांसाहार; विपक्षी दल में छोटा राजन और दाऊद की चर्चा
विरोधी दल में नेताओं की छोटा राजन, बड़ा राजन और दाऊद से तुलना हो रही है। दरअसल, महाकौशल क्षेत्र में विरोधी दल की एक बैठक हुई। जिसमें एक सीनियर लीडर ने नेताओं से कहा- आप लोग हमारी सुनकर अमल में ला पाएंगे क्या? यहां तो ‘छोटा राजन’ और ‘बड़ा राजन’ की ही चलती है। उन्होंने आगे कहा- पार्टी के लिए काम करते-करते उम्र हो गई, बाल सफेद हो गए। इन दोनों ‘राजन’ को कोने के जिले में बैठा ‘दाऊद’ ऑपरेट करता है। एक ‘राजन’ पावर से तो दूसरा दिमाग से खेलता है। ये सुनकर स्टेट लेवल से भेजे गए नेता जी माजरा समझ गए। जहां ये वाकया हुआ, नेता जी वहां प्रभारी मंत्री रह चुके हैं। लिहाजा उन्हें सबकी कुंडली मालूम है। अब, हास-परिहास में पार्टी के भीतर चल रही दादागिरी की यह खबर दिल्ली तक पहुंच गई है। अब देखना है कि पार्टी इन पर क्या लगाम लगाती है। 'सरकार' ने दिया सादगी का संदेश
हाल ही में 'सरकार' बिना ताम-झाम के कॉमन मैन की तरह मार्केट पहुंच गए। उन्होंने एक ठेले से फल खरीदे। वहां डिजिटल पेमेंट किया। इतना ही नहीं सड़क पर रेड सिग्नल होने पर रुके और ट्रैफिक रूल्स का पालन भी किया। 'सरकार' के ये फोटो-वीडियो सामने आए तो इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगी। कुछ लोग कह रहे हैं सरकार ने अपने उन साथियों को सादगी का संदेश दिया है जो वीआईपी ट्रीटमेंट के आदि हो गए हैं और कई मौके पर अपने रवैये से सरकार की किरकिरी भी करा चुके हैं। लोग कह रहे हैं कि 'सरकार' ने उन्हें जमीन पर रहने का संदेश दिया है। दो एसीएस.. बार-बार हो रहे इधर से उधर
राज्य में नई सरकार बनने के बाद एसीएस बने दो अफसर शायद 'सरकार' की कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। यही वजह है कि इनकी जिम्मेदारी बार-बार बदली जा रही है। अब तो इनके मातहत अधिकारी भी कहने लगे हैं कि आखिर सरकार इन्हें बार-बार इधर से उधर क्यों कर रही है? इन्हें पावरफुल विभागों में पदस्थ किया जाता है। फिर थोड़े ही दिनों में जिम्मेदारी बदल दी जाती है। हाल ही में इन दोनों ही अफसरों को नई जिम्मेदारी मिली है। अब देखना यह है कि इस बार ये नए विभागों में कितने दिनों तक टिक पाते हैं। 'राजा' ने ऐसे छोड़ा था मांसाहार
'राजा' के क्षेत्र में लंबे समय बाद जैन संत का आगमन हुआ। उन्होंने बेटे के साथ जैन संत का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद लिया। इसी दौरान जैन संत ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया कि 'राजा' ने नॉनवेज कैसे छोड़ा था। संत ने मंच से कहा- जब ये सूबे के सरकार थे, उस वक्त सिरोंज में हमारा विहार हुआ। उसी दौरान शाकाहार पर लगाई गई एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करने ये भी आए। हमने इनसे पूछा कि क्या करने आए हो तो इन्होंने कहा कि महाराज श्री शाकाहार पर केन्द्रित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करने आया हूं। मैंने इनसे कहा- जो दुनिया को दिखाने आए हो उस अनुरूप खुद का आचरण करना पड़ेगा। इन्होंने वहीं संकल्प लिया और मांसाहार का त्याग कर दिया। ये विधायक का तंज है या तारीफ
बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष के नामांकन से पहले तमाम दावेदार रेस में थे। इस बीच विंध्य क्षेत्र के एक ब्राह्मण विधायक को लेकर एक स्थानीय समाचार पत्र ने छापा कि वे समाज में मजबूत पकड़ रखते हैं और मंत्री बन सकते हैं। न्यूज कटिंग सोशल मीडिया पर शेयर हुई तो पड़ोसी सीट से पार्टी के ही एक विधायक जी ने उस पर कमेंट कर लिखा- ‘मंत्री बनकर तो रहेंगे, योग्यता में कोई कमी है क्या? मुझे जिताने में इन्हीं का तो योगदान रहा है भैया। समझ–समझ के समझ को समझो, समझ–समझना भी एक समझ है। समझ–समझ के जो न समझे मेरी समझ में वो नासमझ है।’ विधायक जी के इस कमेंट को सियासी गलियारों में तंज की नजर से देखा जा रहा है। बारिश में विधायक जी ने दौड़ाई बस
महाकौशल क्षेत्र के एक जिले के एक विधायक जी ने बारिश के मौसम में बस दौड़ाई। विधायक फिल्मी गाने बजाते हुए बस ड्राइव कर रहे थे। सोशल मीडिया पर विधायक का बस दौड़ाते हुए वीडियो जमकर शेयर हो रहा है और तरह-तरह के कमेंट भी हो रहे हैं। विधायक दूसरी बार के एमएलए हैं। 'मैंने 8 बार गिरिराज जी की परिक्रमा की'
चंबल में कांग्रेस का गढ़ रही सीट पर 33 साल बाद भाजपा को कामयाबी मिली। दो-तीन चुनाव और दलबदल के बाद एक भारी-भरकम नेता जी विधायक बने। विधायक के अनुरोध पर सूबे के 'सरकार' उनके गृह क्षेत्र में पहुंचे। मंच पर 'सरकार' को विधायक जी ने बताया कि मैंने 8 बार 26 किलोमीटर गिर्राज जी की परिक्रमा की है। ये सुनकर सरकार अचंभित हो गए। मंत्री ने सुनाई विभाग के कल्चर की कहानी
अपने बयान के कारण हाल ही में चर्चा में आए एक मंत्री जी ने अपने विभाग में कल्चर चेंज होने की कहानी सुनाई। मंत्री जी ने कहा- भले ही हमसे पहले वालों ने कुछ भी किया हो लेकिन, हम तो सबका अपने ऊपर ले लेते हैं। विभाग में “सिस्टम” को लेकर कहा- हमारे यहां पूरा सिस्टम बदल गया है। किसी ठेकेदार को किसी के दरवाजे पर भटकने की जरूरत नहीं हैं। विश्वास न हो तो आप किसी को भेजकर देख लीजिए। हमारे यहां तो 4-5 घंटे तक मीटिंग चलतीं हैं। अधिकारी हमारे सहयोगियों से कहते हैं आपके यहां तो पीएस की जरूरत ही नहीं। ----------------------- ये भी पढ़ें -
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