खबर हटके- 100 रुपए में बिक रहे आलीशान घर:माइक्रोसॉफ्ट ने ₹14 हजार करोड़ में खरीदा इंसानी मल; जानिए ऐसी ही 5 रोचक खबरें

खबर हटके- 100 रुपए में बिक रहे आलीशान घर:माइक्रोसॉफ्ट ने ₹14 हजार करोड़ में खरीदा इंसानी मल; जानिए ऐसी ही 5 रोचक खबरें
घर खरीदने का सपना कौन नहीं देखता। लेकिन अगर आपको सिर्फ 100 रुपए बड़ा घर मिल रहा हो तो आप हैरान रह जाएंगे। यह ऑफर फ्रांस के एक शहर में चल रहा है, जहां आप सिर्फ 100 रुपए देकर घर के मालिक बन सकते हैं। हालांकि, इसमें कुछ शर्तें आपको पूरी करनी होंगी। वहीं हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट ने ₹14 हजार करोड़ खर्च कर इंसानी मल खरीदा है। कंपनी इससे कार्बन एमिशन को कम करने का काम करेगी। लेकिन कैसे जानेंगे डिटेल में… घर खरीदने का सपना कौन नहीं देखता! लेकिन अगर आपको पता चले कि फ्रांस में सिर्फ 1 यूरो (करीब 100 रुपए) में बड़ा घर मिल रहा है, तो आप हैरान रह जाएंगे। फ्रांस के अंबर्ट शहर में घटती आबादी को बढ़ाने के लिए ये अनोखी योजना चलाई जा रही है। अंबर्ट में फिलहाल सिर्फ 6,500 लोग रहते हैं। हालांकि, इस घर को खरीदने के लिए कुछ शर्तें हैं। ₹100 वाले घर के लिए 3 शर्तें कई यूरोपीय शहर ऐसी ही योजनाएं चला रहे हैं, जहां सस्ते घर देकर वे नए लोगों को आकर्षित करते हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने 'वॉल्टेड डीप' नाम की कंपनी के साथ 14 हजार करोड़ रुपए में एक बड़ा समझौता किया है। इस डील के तहत, वॉल्टेड डीप अगले 12 सालों (2038 तक) में 49 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड को परमानेंटली हटाने का काम करेगी। इस तकनीक से कार्बन हटाने का एक्सपेक्टेड खर्च करीब ₹30 हजार प्रति टन आता है। यह काम बायो कचरे को जमीन की गहराई में स्टोर करके किया जाएगा। इस कचरे में बायोसॉलिड्स (जो इंसानी मल का ठोस रूप होता है), जानवरों का गोबर (खाद), पेपर स्लज और खाने-पीने व खेती से बचा हुआ वेस्ट शामिल होगा। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि इससे क्लाइमेट को तुरंत फायदा होगा। डेटा सेंटर से निकलने वाले भारी कार्बन को कम करने के लिए ऐसी प्रोजेक्ट बहुत जरूरी हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए गूगल और अमेजन जैसी कई बड़ी कंपनियां भी ग्रीन एनर्जी सोर्स में इन्वेस्ट कर रही हैं। कैसे काम करती है ये अनोखी तकनीक? वॉल्टेड डीप की यह टेक्नोलॉजी काफी अलग है। इसमें बायो वेस्ट को एक लिक्विड फॉर्म में जमीन में हजारों फीट नीचे, चट्टानी परतों में इंजेक्शन के जरिए स्टोर किया जाता है। यह तरीका कार्बन को हमेशा के लिए हटाता है, मीथेन एमिशन को कम करता है और खतरनाक गैस को हवा में फैलने से रोकता है। वॉल्टेड डीप इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल 2008 से कर रही है और अमेरिका के कई राज्यों में इसकी परमिशन है। सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने एक AI एक्सपर्ट को चार साल के लिए 10,400 करोड़ की सैलरी ऑफर की, लेकिन AI एक्सपर्ट ने इस सैलरी को ठुकरा दिया। इस एक्सपर्ट का नाम है- डेनियल फ्रांसिस, जो अमेरिका की फेमस एबेल कंपनी के फाउंडर हैं। इस डील का मतलब था कि उन्हें हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपए से भी ज्यादा मिलते। मेटा यह बड़ी रकम सिर्फ इसलिए दे रही थी ताकि डेनियल के बनाए AI ऐल्गोरिद्म और उनकी एक्सपर्टाइज किसी और कंपनी के हाथ न लगें। फ्रांसिस ने इस ऑफर को ठुकराते हुए सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। इतने महंगे ऑफर क्यों दिए जाते हैं ? दरअसल, AI की दुनिया में ऐसे बड़े ऑफर्स अब आम बात हो गए हैं। चैटGPT में रिसर्चर रहे रुन बताते हैं कि यह किसी कंपनी को खरीदने जैसा है, जहां आप सीधे किसी बड़े टैलेंट को खरीद लेते हैं। इससे पहले ओपनAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने भी खुलासा किया था कि मेटा उनके टेक्निकल स्टाफ को करीब 830 करोड़ रुपए का बोनस देकर लुभाने की कोशिश की थी, लेकिन उस स्टाफ ने इन ऑफर्स को स्वीकार नहीं किया है। जापान के कोबे शहर में एक व्यक्ति अपनी मां का शव 10 साल से फ्लैट में छिपाकर रह रहा था। अब पुलिस ने 60 साल के इस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। ताकेहिसा मियावाकी नाम के इस व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि सोशल फोबिया की वजह से इसकी सूचना किसी को नहीं दी। मियावाकी बेरोजगार है और उसका कोई स्थाई घर भी नहीं है। पुलिस को कैसे लगी खबर? बीते दिनों मियावाकी सड़क पर लंगड़ाते हुए चल रहा था, तभी पुलिस ने उससे मां के बारे में पूछा, तो मियावाकी ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इससे संदेह पैदा हुआ और अधिकारी ने तुरंत लोकल पुलिस को घर की जांच करने के लिए बोला। फिर जांच में फ्लैट के अंदर टॉयलेट में एक कंकाल मिला। इसके बाद मियावाकी ने बताया कि 10 साल पहले टॉयलेट के दौरान ही उसकी मां की मौत हो गई थी। यह पता होते हुए भी कि मां की मौत हो गई है, सोशल फोबिया की वजह से हॉस्पिटल और पुलिस को जानकारी नहीं दी। हाल ही में एक वैज्ञानिक ने दावा किया कि 10 सालों में कोविड-19 से भी बड़ी महामारी आ सकती है। खास बात ये है कि ये महामारी मंगल ग्रह से आ सकती है। 71 साल के एस्ट्रोनॉमर बैरी डिग्रेगोरियो ने कहा नासा ने मंगल ग्रह से पृथ्वी पर जो सैंपल लाए हैं, उसमें बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नासा 2030 तक मंगल ग्रह पर इंसानों को भेजने की तैयारी कर रहा है। मंगल ग्रह पर परिस्थिति धरती से अलग है, जिससे मंगल पर धरती के माइक्रोब्स जा सकते हैं, और जब मंगल से सैंपल वापस आएंगे तो वहां के माइक्रोब्स धरती पर आ सकते हैं। अगर कोई अंतरिक्ष यात्री को मंगल ग्रह पर कोई नई बीमारी के लक्षण दिखते हैं, तो इलाज के लिए धरती पर आने में एक साल से ज्यादा लग सकता है। तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...