आकाश प्राइम डिफेंस सिस्टम का भारत ने किया सफल टेस्ट:15,000 फीट पर 2 ड्रोन मार गिराए, 'दागो और भूल जाओ' मोड पर काम करता है
भारतीय सेना ने लद्दाख में स्वदेशी रूप से विकसित एयर डिफेंस सिस्टम 'आकाश प्राइम' का सफल परीक्षण किया। DRDO ने इसका वीडियो गुरुवार को जारी किया। इस एडवांस मिसाइल सिस्टम को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। इस सिस्टम से पूर्वी लद्दाख में यह 15,000 फीट (4500 मीटर) से अधिक की ऊंचाई पर उड़ रहे दो ड्रोन मार गिराए। आकाश प्राइम, आकाश वेपन सिस्टम का नया और एडवांस वर्जन है। इसे ऊंचाई और कम ऑक्सीजन वाले इलाकों में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है। दागो और भूल जाओ मोड में करेगा काम सिस्टम सिस्टम के हरेक लॉन्चर में तीन मिसाइलें हैं, जो 'दागो और भूल जाओ' मोड में काम करती हैं। ये मिसाइलें लगभग 20 फीट लंबी और 710 किग्रा वजनी हैं। प्रत्येक मिसाइल 60 किलोग्राम का वारहेड ले जा सकती है। इसके साथ ही यह सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरी आकाश मिसाइल प्रणाली के विकास में लगभग 1,000 करोड़ रुपए (17 करोड़ डॉलर) की लागत आई है। यह अन्य देशों में विकसित ऐसी ही प्रणालियों के मुकाबले 8-10 गुना कम है। यह बताता है कि भारत कम लागत पर हाई-क्वालिटी वाली रक्षा तकनीक विकसित करने में सक्षम है। ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान आकाश ने रोके थे पाकिस्तान के हमले
यह आधुनिक सिस्टम डीआरडीओ और भारत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा विकसित किया गया है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक की थी। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से भी भारत पर हवाई हमले किए गए थे। हमलों के दौरान पाकिस्तान के चीन की मिसाइलें और तुर्किए के ड्रोन का भी सहारा लिया था। लेकिन, इन हमलों को भारत के एयर डिफेंस सिस्टम की आकाश मिसाइलों ने नाकाम कर दिया था। डीआरडीओ और बीईएल ने ही एयर डिफेंस सिस्टम का यह आधुनिक वर्जन लॉन्च किया है। ये खबर भी पढ़ें... स्वदेशी तकनीक से बना स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप 62 मिनट उड़ा:MP के श्योपुर में सफल परीक्षण पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत को स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म की पहली उड़ान का परीक्षण करने में सफलता मिली है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने मध्यप्रदेश के श्योपुर में शनिवार को इसका परीक्षण किया। इस एयरशिप को आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने विकसित किया है। पूरी खबर पढ़ें...
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