मेडिकल कॉलेज में क्लर्क से डायरेक्टर बने दिलीप जायसवाल:BJP प्रदेश अध्यक्ष ने बेटे को रजिस्ट्रार, पत्नी को मेंबर बनाया, स्थापना करने वालों की फैमिली को बाहर निकाला

मेडिकल कॉलेज में क्लर्क से डायरेक्टर बने दिलीप जायसवाल:BJP प्रदेश अध्यक्ष ने बेटे को रजिस्ट्रार, पत्नी को मेंबर बनाया, स्थापना करने वालों की फैमिली को बाहर निकाला
’दिलीप जायसवाल ने सिख माइनॉरिटी के कॉलेज माता गुजरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज पर न केवल कब्जा किया है, बल्कि 25-30 वर्ष से अपने कंट्रोल में रखा है। जिस व्यक्ति ने इस संस्था को बनाया, एक-एक कर उनके पूरे परिवार को हटा दिया और खुद क्लर्क से डायरेक्टर बन गए।’ जन सुराज के संस्थापन प्रशांत किशोर ने 6 जुलाई को पटना में ये आरोप लगाया। इस बयान के बाद सियासी कंट्रोवर्सी बढ़ने लगी। हालांकि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं आया। परिवार का भी आरोप है कि 'BJP प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कॉलेज की स्थापना करने वालों की फैमिली को बाहर निकालकर अपने बेटे को मेडिकल कॉलेज का डायरेक्टर और पत्नी को मेंबर बना दिया।' मेडिकल कॉलेज पर चल रही इस सियासत की भास्कर ने पड़ताल की। ये कॉलेज किसका है। दिलीप जायसवाल की इसमें एंट्री कैसे और कब हुई। कैसे जायसवाल ने बेटे को रजिस्ट्रार और पत्नी को मेंबर बनाया, इस कॉलेज से जुड़े लोग अभी कहां हैं। पढ़िए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट... सबसे पहले कॉलेज के शुरू होने की पूरी कहानी जानिए कांग्रेस नेता और दो बार MLC रहे सरदार मौलेश्वर प्रसाद सिंह की तरफ से 22 जून 1990 को एक ट्रस्ट के माध्यम से कॉलेज की स्थापना की गई थी। नाम था माता गुजरी देवी मेमोरियल कॉलेज। इसे अल्पसंख्यक एक्ट के माध्यम से बनाया गया था। तब इसका हेडक्वार्टर पटना का रुकनपुरा था। 26 सितंबर 1991 को मौलेश्वर सिंह और लायंस सेवा केंद्र ट्रस्ट, किशनगंज के बीच एक करार हुआ। इस करार के तहत लायंस सेवा ट्रस्ट ने किशनगंज में चलाए जा रहे अपने अस्पताल की खाली पड़ी जमीन पर बिल्डिंग बनाकर मेडिकल कॉलेज खोलने की इजाजत दी। इस एग्रीमेंट के तहत लॉयंस सेवा केंद्र ट्रस्ट ने किशनगंज स्थित अपने खाली पड़े अस्पताल को चलाने के लिए 1000 रुपए सालाना के लीज पर कॉलेज के लिए दिया। बदले में उनके 5 मेंबर को इस ट्रस्ट में जगह दी गई। नए करार के तहत अब कॉलेज का नाम बदलकर माता गुजरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एंड लायंस सेवा केंद्र अस्पताल कर दिया गया। कॉलेज पटना से किशनगंज शिफ्ट कर दिया गया। इस ट्रस्ट में अब सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 27 कर दी गई। तय हुआ कि सिख अल्पसंख्यक संस्थान होने के कारण मैनेजमेंट में टू थर्ड मेंबर सिख समुदाय और वन थर्ड मेंबर गैर सिख समुदाय के रहेंगे। इस हिसाब से ट्रस्ट में कुल 27 सदस्य होंगे। जिनमें 18 सदस्य सिख समुदाय से होंगे और गैर सिख सदस्य में से 4 सदस्य माता गुजरी मेडिकल कॉलेज की तरफ से चुने जाएंगे और शेष 5 गैर सिख सदस्य लॉयन्स सेवा ट्रस्ट की ओर से चुने जाएंगे। इसका पूरा डॉक्यूमेंट भास्कर के पास है। अब जानिए... दिलीप जायसवाल की कैसे हुई अस्पताल में एंट्री CM के रिश्तेदार ने कराई थी दिलीप जायसवाल की एंट्री बिहार के सीएम रहे भगवत झा आजाद के रिश्तेदार अमरेंद्र कुमार उर्फ बच्चा झा को मौलेश्वर सिंह की तरफ से ट्रस्ट में शामिल किया गया था। वे ट्रस्ट के फाउंडर चेयरमैन भी थे। मौलेश्वर सिंह के छोटे बेटे गुरुदयाल सिंह बताते हैं, 'उनके परिवार के साथ दिलीप जायसवाल की पहली मुलाकात बच्चा झा के माध्यम से ही हुई थी। शुरुआत में दिलीप जायसवाल को कॉलेज में क्लर्क की जिम्मेदारी दी गई थी।’ गुरुदयाल सिंह बताते हैं, ‘बच्चा झा बमुश्किल एक साल तक कॉलेज के साथ जुड़े रहे। इसके बाद प्रबंधन की तरफ से उनसे रिजाइन ले लिया गया। उनकी छुट्‌टी एक साल के भीतर हो गई, लेकिन इस बीच दिलीप जायसवाल ने सिंह परिवार में अपनी पैठ मजबूत कर ली थी।’ खास कर मौलेश्वर सिंह के बड़े बेटे करतार सिंह के साथ जो ट्रस्ट और कॉलेज के सचिव थे। कॉलेज के संचालन की जिम्मेदारी इन्हीं के ऊपर थी। एक साल में ही करतार सिंह जायसवाल पर भरोसा करने लगे थे।’ मौलेश्वर सिंह के निधन के बाद मजबूत हुए दिलीप जायसवाल चार साल के भीतर दिलीप जायसवाल ने कॉलेज में अपना नेटवर्क मजबूत किया और क्लर्क से प्रॉक्टर और इसके बाद एडमिनिस्टेटर बन गए। इस बीच 13 जुलाई 1996 को फाउंडर मौलेश्वर सिंह का निधन हो गया। अब कॉलेज में उत्तराधिकार को लेकर दो भाइयों के बीच बहस छिड़ गई। डीड के मुताबिक पिता के निधन के बाद करतार सिंह के साथ उनके छोटे भाई गुरुदयाल सिंह और मां प्रीतमा कौर को मैनेजिंग ट्रस्टी में शामिल होना था। इनके पिता ने इन दोनों को लाइफ मेंबर्स नॉमिनेट किया था। यानी की कॉलेज के मैनेजमेंट में इनकी हिस्सेदारी होनी थी। करतार सिंह ने भाई की जगह अपनी पत्नी अमरजीत कौर को इस जगह शामिल कर दिया। भाई को मेंबर बनाया। इसके बाद उन्हें वहां से भी हटा दिया। इनके अलावा फैमिली के जितने रिलेटिव थे, करतार सिंह ने सभी को एक-एक कर बाहर कर दिया। 10 साल में कॉलेज के डायरेक्टर बने जायसवाल गुरुदयाल सिंह आरोप लगाते हैं, नियम को दरकिनार कर 30 सितंबर 2000 को दिलीप जायसवाल की तरफ से बतौर चीफ एडमिनिस्ट्रेटर एक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में करतार सिंह को कॉलेज कमेटी से बाहर कर दिया गया। इसके बाद मैनेजिंग कमेटी पर पूरी तरह से उनका कब्जा हो गया। 2023 में करतार सिंह की भी गंभीर बीमारी से मौत हो गई। मौजूदा समय में मौलेश्वर सिंह, जिन्होंने इस कॉलेज की स्थापना की उनका कोई फैमिली मेंबर इस कॉलेज और ट्रस्ट का मेंबर नहीं है। गुरुदयाल आरोप लगाते हैं कि मौजूदा समय में रामूवालिया ट्रस्ट के अध्यक्ष और तोषणीवाल सचिव हैं। इन्हीं दोनों की मदद से दिलीप जायसवाल ने पूरे कॉलेज पर कब्जा कर लिया है। फिलहाल दिलीप जायसवाल अब इस कॉलेज के डायरेक्टर बन गए हैं। अब फाउंडर मौलेश्वर सिंह की फैमिली को सुनिए, जान देकर भी अपना कॉलेज हासिल करूंगी मौलेश्वर सिंह की बेटी अमृत कौर ने बताया, ‘हमलोगों के साथ बहुत चीटिंग हुई है। हम फाउंडर की बेटी हैं, लेकिन आज हम वहां कुछ भी नहीं हैं। वो एकमात्र क्लर्क थे और आज उनका बेटा- बहू क्या बने हुए हैं, ये जांच का विषय है। अब मेरी जान भी चली जाए, लेकिन मैं पीछे नहीं हटने वाली हूं। कॉलेज में भ्रष्टाचार और साजिश का गठजोड़, इसकी जांच हो झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व सचिव और रिटायर्ड आईएएस जगजीत सिंह बताते हैं, ‘इस मामले में फंडामेंटल राइट्स का उल्लंघन हो रहा है। उस कॉलेज की जांच की जाए तो वहां भ्रष्टाचार और साजिश का भरपूर गठजोड़ है। अगर कॉलेज की ठीक से जांच की जाए तो वहां छिपे राज बाहर निकलेंगे। दिलीप जायसवाल कॉलेज के डायरेक्टर हैं और उनकी पत्नी मेंबर... अब MGM मेडिकल कॉलेज के बारे में जानिए इच्छित भारत ने कहा- बहुत सारी बातें ओपन प्लेटफॉर्म पर नहीं की जा सकतीं माता गुजरी देवी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और दिलीप जायसवाल के बेटे इच्छित भारत ने भास्कर को बताया 'बहुत सारी बातें ओपन प्लेटफॉर्म पर नहीं की जाती हैं। कोर्ट में जो बातें होंगी कही जाएंगी। चांसलर कॉलेज के मामले में पूरी तरह एक्टिव हैं। मैं इस पूरे मामले पर कुछ भी कहने के लिए ऑथराइज्ड नहीं हूं। बहुत जल्द इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जाएगी। दिलीप जायसवाल से इन सवालों का नहीं मिला जवाब इस मामले में हमने दिलीप जायलवाल का पक्ष जानने की कोशिश की। हमने उन्हें कॉल किया, मेल किया। वॉट्सऐप पर पूरा मामला बताते हुए सवाल भी किए गए, लेकिन उन्होंने कोई रिप्लाई नहीं किया। उनका पक्ष आने पर हम उसे भी अपनी खबर में जोड़ेंगे। हमने BJP प्रदेश अध्यक्ष से पूछा- माता गुजरी देवी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज और इसके ट्रस्ट के संचालन को लेकर आप पर कुछ आरोप लगाए जा रहे है। जो इस प्रकार है। 1. आपने संस्थापक सदस्यों को ट्रस्ट से अवैध तरीके से हटाकर इस संस्थान पर अवैध कब्जा कर लिया है? 2. ⁠आपने संस्थापक सदस्यों के फैमिली मेंबर को हटाकर अपने फैमिली मेंबर को ट्रस्ट में शामिल किया? 3. क्लर्क से डायरेक्टर कैसे बन गए? 4. ⁠फाउंडर सेक्रेटरी को आपने झूठे केस में फंसाया, जिससे परेशान होकर वो गंभीर बीमारी के शिकार हो गए और इससे उनकी मौत हो गई? सर, भास्कर इन सवालों पर आपका पक्ष जानना चाहता है। इन आरोपों में कितनी सच्चाई है?