उज्जैन में रोपवे से हर घंटे 2000 यात्री करेंगे सफर:55 गोंडोले चलेंगे; निर्माण कंपनी के CEO बोले- अगले साल के अंत तक तैयार होगा प्रोजेक्ट
उज्जैन में रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक सिंहस्थ को देखते हुए रोपवे का निर्माण किया जा रहा है। दुनिया की प्रमुख रोपवे कंपनी डोप्पेलमेयर, उज्जैन रोपवे के लिए अपनी टेक्नोलॉजी देने के साथ ही इसका डिजाइन भी तैयार कर रही है। डोप्पेलमेयर रोपवे कंपनी के एमडी और सीईओ प्रफुल्ल चौधरी ने दैनिक भास्कर से खास चर्चा में बताया कि उज्जैन में किस प्रकार से काम किया जा रहा है?, किस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है, इमरजेंसी में क्या व्यवस्था रहेगी, इसकी लागत कितनी है, परियोजना कब तक पूरी होगी और संभावित किराया कितना हो सकता है? बता दें कि उज्जैन रोपवे परियोजना के लिए नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड कंसाइनिंग एजेंसी है। जबकि एमएसआईएल इसका निर्माण कार्य कर रही है और डोप्पेलमेयर इस रोपवे के लिए ओईएम टेक्नोलॉजी सप्लायर है। पहले जानिए उज्जैन के रोपवे प्रोजेक्ट के बारे में...
उज्जैन में रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक 1.7 किमी लंबा रोपवे तैयार किया जा रहा है। इस रूट पर कुल तीन स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इन स्टेशनों से यात्री रोपवे के माध्यम से आना-जाना कर सकेंगे। 1.7 किमी के रूट पर कुल 55 गोंडोले (केबिन) चलाए जाएंगे। रोपवे प्रतिदिन 16 घंटे संचालित होगा। एक गोंडोला को अपना सफर पूरा करने में लगभग 5 से 7 मिनट का समय लगेगा। अब पढ़िए, डोप्पेलमेयर के सीईओ प्रफुल्ल चौधरी की दैनिक भास्कर से पहली बातचीत कितनी लागत से और किस टेक्नोलॉजी से तैयार हो रहा है रोपवे?
जवाब- उज्जैन में मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला टेक्नोलॉजी लगाई जा रही है। इसकी कुल लागत लगभग 200 करोड़ रुपए है। इसके लिए ऑस्ट्रिया की टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराई जा रही है। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। अगले साल के अंत तक यह प्रोजेक्ट पूरी तरह तैयार हो जाएगा। उज्जैन में क्या चुनौती आ रही है?
जवाब: रोपवे का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसे लगाने के लिए किसी चीज को हटाने की आवश्यकता नहीं है। इसे दो टावरों के बीच 500 से 600 मीटर की दूरी में आसानी से लगाया जा सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह घरों के ऊपर से भी गुजर सकता है, इसलिए काम करते समय किसी को डिस्टर्ब किए बिना निर्माण संभव है। उज्जैन में सबसे ऊंचा टावर 55 मीटर बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में कहां-कहां रोपवे की योजना चल रही है?
जवाब: देखिए, आमतौर पर लोगों को लगता है कि रोपवे केवल पहाड़ों पर इस्तेमाल होता है, लेकिन दुनिया के कई देश रोपवे को अर्बन सिटी ट्रांसपोर्ट के रूप में भी उपयोग कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में अगर आप देखें तो जहां मेट्रो लगी है। वहां लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए रोपवे एक बेहतर विकल्प हो सकता है, ताकि लोग आसानी से मेट्रो तक पहुंच सकें। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में, जहां जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, वहां अर्बन ट्रांसपोर्ट के लिए इस तरह की सुविधा की जरूरत है। उज्जैन रोपवे में हादसे न हो, इसके लिए क्या उपाय किए जाएंगे?
जवाब: उज्जैन में जो रोपवे लगाया जा रहा है, वह यूरोपीय मानकों पर आधारित है। सरकार ने पब्लिक सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए टेंडर में कई महत्वपूर्ण शर्तें जोड़ी हैं। डोप्पेलमेयर कंपनी यह गारंटी देती है कि यदि किसी भी प्रकार की समस्या आती है, तो हमारा गोंडोला सुरक्षित रूप से स्टेशन तक वापस पहुंच जाएगा। आपने देखा होगा कि अन्य सिस्टम में इमरजेंसी के समय हेलिकॉप्टर या फायर ब्रिगेड से यात्रियों को निकाला जाता है, लेकिन डोप्पेलमेयर के सिस्टम में ऐसी स्थिति आने की संभावना न के बराबर होती है। क्या अर्बन ट्रांसपोर्ट के रूप में रोपवे सफल है?
जवाब: भारत में शिमला में 15 किलोमीटर लंबे रोपवे की योजना बनाई जा रही है। दक्षिण अमेरिका में 30 किलोमीटर और मेक्सिको में 20 किलोमीटर लंबा रोपवे लगा है। इंडिया के कई शहरों में भी इसकी योजना पर काम चल रहा है। लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों में रोपवे को अर्बन ट्रांसपोर्ट के रूप में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है। अर्बन ट्रांसपोर्ट में रोपवे का क्या फायदा है?
जवाब: रोपवे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी तुलना में मेट्रो या अन्य ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है। हमारे देश के कई शहर इस तरह विकसित हुए हैं कि वे पहले छोटे-छोटे सेंटर थे, जो धीरे-धीरे फैलते गए। पुराने शहरों में आप देखेंगे कि वहां की सड़कें बहुत संकरी हैं। ऐसे शहरों में अर्बन ट्रांसपोर्ट लाना हो तो रोपवे सबसे अच्छा विकल्प है। इसमें न तो तोड़फोड़ करनी पड़ती है और न ही जमीन अधिग्रहण की जरूरत होती है। रोपवे के लिए केवल टावर लगाने होते हैं और इसके स्टेशन भी एलिवेटेड बनाए जा सकते हैं। दूसरा बड़ा फायदा यह है कि इसका कंस्ट्रक्शन टाइमिंग बहुत कम है। रोपवे, लास्ट माइल कनेक्टिविटी में किस प्रकार सहायक हो सकता है?
जवाब: इंदौर को उदाहरण के रूप में लीजिए। यहां मेट्रो चल रही है। मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए लोग या तो अपने निजी वाहन का उपयोग करते हैं या उन्हें कोई छोड़ने आता है। यानी मेट्रो तक पहुंचने के लिए किसी न किसी लास्ट माइल कनेक्शन की जरूरत होती है। मेट्रो तक पहुंचने में भी ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या बन जाता है। ऐसे में लास्ट माइल तक सुगम कनेक्टिविटी के लिए कोई ठोस समाधान होना चाहिए। इस स्थिति में रोपवे एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यात्री अपने घर के पास स्थित रोपवे स्टेशन से सवार होकर बिना किसी ट्रैफिक समस्या के सीधे मेट्रो स्टेशन तक पहुंच सकते हैं। रोपवे पब्लिक सेफ्टी के लिहाज से कितना सुरक्षित सिस्टम है?
जवाब: रोपवे लगभग 150 सालों से यूरोपीय देशों में सफलतापूर्वक काम कर रहा है। इसके स्टैंडर्ड यूरोप में विकसित किए गए हैं। दुनिया भर में जितने भी अर्बन रोपवे लगे हैं, वे सभी यूरोपीय मानकों के अनुसार ही लगाए गए हैं। पब्लिक सेफ्टी के लिहाज से अब इसमें कई आधुनिक सुधार हो चुके हैं, जिससे यह सिस्टम और अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बन गया है। रोपवे एक घंटे में कितने यात्रियों को ले जा सकता है?
जवाब: रोपवे एक दिशा में प्रति घंटे लगभग 8,000 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होता है। एक मोटर से आप 6 से 8 किलोमीटर तक रोपवे चला सकते हैं। यदि दूरी इससे अधिक हो, तो अतिरिक्त मोटर जोड़कर इसे आगे तक बढ़ाया जा सकता है।
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