अंतरिक्ष से लौटकर शुभांशु चलना सीख रहे:लिखा- सीधा चलना मुश्किल, संतुलन बिगड़ जाता है; इन सबसे मानसिक तनाव

अंतरिक्ष से लौटकर शुभांशु चलना सीख रहे:लिखा- सीधा चलना मुश्किल, संतुलन बिगड़ जाता है; इन सबसे मानसिक तनाव
अंतरिक्ष में 18 दिन रहकर लौटे लखनऊ के एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला अब डॉक्टरों की निगरानी में हैं। उन्होंने गुरुवार को तस्वीरें शेयर करते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा- अंतरिक्ष से लौटकर अब फिर से चलना सीख रहा हूं। जैसे धरती से अंतरिक्ष में जाने पर कई तरह के बदलाव होते हैं। उसी तरह के बदलाव लौटने के बाद भी होते हैं। अंतरिक्ष से लौटने के बाद सीधा चलना भी चुनौती बन जाता है। शरीर की प्रतिक्रिया धीमी हो जाती है। संतुलन बिगड़ता है। इन सबसे मानसिक तनाव भी होता है, लेकिन ये सभी बदलाव अस्थायी होते हैं। समय के साथ शरीर खुद को फिर से संतुलित कर लेता है। एक्सियम मिशन 4 के तहत 25 जून को शुभांशु शुक्ला सहित चार एस्ट्रोनॉट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुए थे। 26 जून को भारतीय समयानुसार शाम 4:01 बजे ISS पहुंचे थे। 18 दिन रहने के बाद 15 जुलाई को पृथ्वी पर लौट थे। कैलिफोर्निया के तट पर लैंडिंग हुई थी। 2 तस्वीरें देखिए- अंतरिक्ष में जाने और धरती पर लौटने पर क्या दिक्कतें होती हैं, शुभांशु ने बताया... शुभांशु ने लिखा- धरती पर हम गुरुत्वाकर्षण के वातारण में बड़े होते हैं। हमारा शरीर इसके अलावा कुछ और नहीं जानता है। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण रहित यानी माइक्रो ग्रेविटी में रहने का शरीर पर कई तरह से असर पड़ता है। अंतरिक्ष में शरीर से तरल पदार्थ कम होने लगते हैं। दिल की धड़कन धीमी हो जाती है, क्योंकि दिल को खून ऊपर की ओर पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। इससे उसका काम आसान हो जाता है और वह धीमा हो जाता है। अंतरिक्ष में शरीर का संतुलन बनाए रखने वाली प्रणाली पूरी तरह प्रभावित होती है। उसे नए वातावरण के हिसाब से ढलना पड़ता है। हमारा शरीर गुरुत्वाकर्षण के अनुसार डिजाइन हुआ है। अंतरिक्ष में जब वह गुरुत्वाकर्षण के बिना होता है, तो हर अंग को नए सिरे से काम करना पड़ता है। हालांकि, शरीर जल्दी ही खुद को इस नए वातावरण में ढाल लेता है। अंतरिक्ष यात्री सामान्य महसूस करने लगते हैं। इसी तरह के बदलाव धरती पर लौटने के बाद भी होते हैं। सीधा चलना जैसे साधारण काम भी चुनौती बन जाते हैं। शरीर की प्रतिक्रिया धीमी हो जाती है। संतुलन बिगड़ता है। इन सबसे मानसिक तनाव भी होता है, लेकिन ये सभी बदलाव अस्थायी होते हैं। समय के साथ शरीर खुद को फिर से संतुलित कर लेता है। इन प्रभावों को समझना जरूरी है, क्योंकि इससे लंबी अंतरिक्ष उड़ानों के लिए समाधान तैयार किए जा सकते हैं। अब पढ़िए परिवार से मुलाकात... धरती पर लौटने के बाद शुभांशु शुक्ला ने बुधवार को पत्नी कामना और 6 साल के बेटे किआश से मुलाकात की थी। शुभांशु ने पत्नी को गले लगाया और बेटे को गोद में उठाया था। शुभांशु ने तस्वीरें शेयर करते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा था- अंतरिक्ष की उड़ान अद्भुत होती है, लेकिन लंबे समय बाद अपनों से मिलना भी उतना ही अद्भुत होता है। धरती पर लौटकर जब परिवार को गले लगाया तो लगा कि जैसे घर आ गया। शुभांशु ने लिखा- आज ही किसी प्रियजन को खोजें और उन्हें बताएं कि आप उनसे प्यार करते हैं। हम अक्सर जीवन में व्यस्त हो जाते हैं और भूल जाते हैं कि हमारे जीवन में लोग कितने अहम हैं। स्पेस मिशन जादुई होते हैं, लेकिन उन्हें इंसान ही जादुई बनाता है। 18 दिन स्पेस स्टेशन में शुभांशु ने क्या-क्या किया 41 साल बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष में गया अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और भारतीय एजेंसी इसरो के बीच हुए एग्रीमेंट के तहत भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को इस मिशन के लिए चुना गया था। शुभांशु इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जाने वाले पहले और स्पेस में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। इससे 41 साल पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत यूनियन के स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष यात्रा की थी। शुभांशु का ये अनुभव भारत के गगनयान मिशन में काम आएगा। ये भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य भारतीय गगनयात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और सुरक्षित रूप से वापस लाना है। इसके 2027 में लॉन्च होने की संभावना है। भारत में एस्ट्रोनॉट को गगनयात्री कहा जाता है। इसी तरह रूस में कॉस्मोनॉट और चीन में ताइकोनॉट कहते हैं। -------------- शुभांशु से जुड़ी हुई ये खबर पढ़िए- 'इतना प्राउड फील कराया कि सपने कम पड़ गए':लखनऊ में शुभांशु शुक्ला की मां रो दीं, पिता बोले- बेटा 144 करोड़ में अकेला मेरे जीवन का सबसे बड़ा दिन है। मेरी लाइफ का सबसे बड़ा अचीवमेंट है। सब पूछते हैं आपने कौन सा पदक जीत लिया? मैं ये कहना चाहूंगा कि मैंने सबसे बड़ा पदक जीत लिया। मेरे बेटे ने वो कर दिखाया, जो 144 करोड़ की आबादी में कोई न कर सका। वो देश की आबादी में अकेला एक है। यही मेरे जीवन का सबसे बड़ा ...पूरी खबर पढ़ें