हिमाचल में बादल फटने की घटनाओं की स्टडी शुरू:केंद्रीय टीम ने मुख्य सचिव के साथ की मीटिंग; क्लाउड-बर्स्ट के एविडेंस एकत्र करने में जुटी
हिमाचल प्रदेश में बार-बार बादल फटने की घटनाओं पर स्टडी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आग्रह पर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा शिमला भेजी गई टीम ने आज मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व व अन्य अधिकारियों के साथ मीटिंग की। इसमें केंद्रीय टीम को बादल फटने की घटनाओं की जानकारी दी गई। अब केंद्रीय टीम फील्ड में जहां बादल फटने की घटनाएं पेश आई हैं, वहां नुकसान देखने रवाना हो गई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक डीसी राणा ने बताया कि फील्ड से बादल फटने के एविडेंस जुटाने के बाद केंद्रीय टीम के कुछ सदस्य कल वापस शिमला लौटेंगे। इसके बाद मौसम विज्ञान केंद्र शिमला, राज्य आपदा प्रबंधन समेत कई एजेंसियों से डाटा कलेक्ट करेंगे। डीसी राणा ने बताया कि इस तरह की स्टडी शायद पहले कभी नहीं की है। हिमाचल में 2023 के बाद से बादल फटने की घटनाएं बहुत बड़ी हैं। इसलिए रूट कॉज जानना जरूरी हो गया है। केंद्रीय टीम साइंटिफिक एविडेंस जुटाने और इनका एनालिसिस करने के बाद बादल फटने के कारणों का पता लगाएगी। केंद्रीय टीम को अधिकारियों ने दी जानकारी हिमाचल के अधिकारियों ने टीम को बताया कि किस तरह चंद मिनटों के भीतर भारी बारिश तबाही का कारण बन रही है। इससे लोगों के घर, सड़क, रास्ते, खेत-खलियान और विभिन्न प्रोजेक्ट बाढ़ में बह रहे हैं। केंद्रीय टीम कल और परसों भी हिमाचल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जाकर बादल फटने से हुए नुकसान को देखेगी और एविडेंस जुटाएगी। दिल्ली लौटने के बाद केंद्रीय टीम 5 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपेंगी। इस मानसून सीजन में 25 जगह बादल फटे प्रदेश में इस मानसून सीजन में 25 जगह बादल फटने की घटनाएं पेश आई है। इससे जान व माल का भारी नुकसान हुआ है। अकेले मंडी जिला 15 जगह बादल फटा है। चंबा 4 और कुल्लू में 3 जगह बादल फटने की घटनाएं पेश आ चुकी है। बादल फटने से 14 और इसके बाद बाढ़ में बहने से 8 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 34 लोग कई दिनों से लापता है। कैसे फटता है बादल? बादल फटना एक प्राकृतिक घटना है। जब जमीन से गर्म हवाएं बादलों की तरफ उठती है और बारिश की बूंदों को ऊपर की तरफ ले जाती है, तो इससे बारिश ठीक से नहीं हो पाती जिससे बादलों में बहुत अधिक नमी हो जाती है। फिर जब ऊपर की तरफ जाने वाली हवा कमजोर हो जाती है, तब ऐसी स्थिति में बादल में जो भी पानी जमा होता है वो एक साथ बहुत तेजी बरसता है। इसे बादल फटना कहते हैं। बादल फटने पर 100 मिलीमीटर या इससे भी ज्यादा बारिश चंद मिनटों में एक सीमित क्षेत्र में होती है। इससे बाढ़ और लैंडस्लाइड की घटनाएं देखने को मिलती है। केंद्रीय टीम में ये साइंटिस्ट मौजूद केंद्रीय टीम सीएसआईआर रुड़की के चीफ साइंटिस्ट कर्नल केपी सिंह की अध्यक्षता में शिमला पहुंची है। केंद्रीय टीम में कर्नल केपी सिंह के अलावा सीएसआईआर रुड़की के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एसके नेगी, मणिपुर यूनिवर्सिटी के रिटायर जियोलॉजिस्ट अरुण कुमार, आईआइटीएम रिसर्च सेंटर पुणे की सुष्मिता, आईआईटी इंदौर की सिविल इंजीनियर नीलिमा शामिल हैं।
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