हिमाचल CM ने अमित शाह से मांगी मदद:बोले-आपदा से 1000 करोड़ का नुकसान, PM गति शक्ति योजना में सड़कें शामिल करने का आग्रह

हिमाचल CM ने अमित शाह से मांगी मदद:बोले-आपदा से 1000 करोड़ का नुकसान, PM गति शक्ति योजना में सड़कें शामिल करने का आग्रह
हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी और 16वें वित्तायोग के अध्यक्ष डॉ.अरविंद पनगढ़िया से मुलाकात की। मुख्यमंत्री सुक्खू ने अमित शाह को बादल फटने से हुए नुकसान से अवगत कराया। उन्होंने राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए केंद्र सरकार से उदार सहायता का आग्रह किया। CM सुक्खू ने बताया, भारी बारिश और लैंडस्लाइड से अब तक 1000 करोड़ रुपए की संपत्ति तबाह हो गई है। प्राकृतिक आपदा के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। सड़क, पुलों, भवनों, पेयजल एवं सिंचाई योजनाओं और बिजली आपूर्ति परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा, साल 2023 से प्रदेश को निरंतर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 3 वर्षों में प्रदेश को लगभग 21 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा, प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा राहत एवं पुनर्निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित दिशा-निर्देश काफी कम है। वर्तमान सीमा को संशोधित कर इसे 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का आग्रह किया। इस पर अमित शाह ने हर संभव सहायता करने का भरोसा दिया। गडकरी से कुछ प्रोजेक्ट PM गति शक्ति योजना में डालने की मांग अमित शाह से पहले मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को हिमाचल में बाढ़ और लैंडस्लाइड से हुए भारी नुकसान से अवगत करवाया। सीएम सुक्खू ने NH प्रोजेक्ट में विभिन्न कारणों से हो रहे विलंब के बारे में भी केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी और इन परियोजनाओं की सभी औपचारिकताएं पूरी करवाने का आग्रह किया ताकि निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किया जा सके। उन्होंने एनएच प्रोजेक्ट में सुरंग निर्माण को प्राथमिकता देने पर भी बल दिया। 16वें वित्त आयोग अध्यक्ष से की मीटिंग इससे पहले मुख्यमंत्री सुक्खू ने अरविंद पनगढ़िया से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने हिमाचल की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए वित्तायोग से सहयोग मांगा। उन्होंने कहा, राज्य की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आयोग से हिमाचल के हित में सिफारिश करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि, पहाड़ी राज्यों में अन्य राज्यों की तुलना में खर्च कई गुना अधिक होता है। इसलिए पहाड़ी राज्यों को उनकी जनसंख्या के अनुपात से कम से कम दोगुना हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने आयोग से राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित राजस्व संसाधनों को ध्यान में रखते हुए राजस्व घाटा अनुदान जारी रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 15वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान में भारी कटौती की गई है, जिसके चलते राज्य को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। सुक्खू ने पहाड़ी राज्यों के लिए वार्षिक बजट में अलग से ग्रीन फंड का प्रावधान करने अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि इस विषय में प्रधानमंत्री के साथ भी चर्चा की गई है। डॉ. पनगढिया को अवगत करवाया और इन सुझावों को स्वीकार करने का आग्रह किया।