सुप्रीम कोर्ट बोला-पुलिसकर्मियों को सस्पेंड क्यों नहीं किया?:देवा पारदी केस में एमपी सरकार से कहा- आरोपियों से मिलीभगत; एक माह बाद भी गिरफ्तारी नहीं

सुप्रीम कोर्ट बोला-पुलिसकर्मियों को सस्पेंड क्यों नहीं किया?:देवा पारदी केस में एमपी सरकार से कहा- आरोपियों से मिलीभगत; एक माह बाद भी गिरफ्तारी नहीं
गुना के चर्चित देवा पारदी (26) की मौत के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कथित रूप से जिम्मेदार दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित न करने पर सवाल खड़ा किया। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से कहा, आप उनके साथ मिलीभगत कर रहे हैं... आप अप्रैल से उनकी तलाश कर रहे हैं फिर भी आपने उन्हें निलंबित क्यों नहीं किया? दरअसल, देवा पारधी की 15 जुलाई 2024 में पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। फरार आरोपी पुलिसकर्मियों की खोज के लिए सीबीआई ने दो लाख रुपए का इनाम घोषित किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सीबीआई को गिरफ्तारी में ढिलाई पर कड़ी फटकार लगाई थी। गुरुवार को फिर सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। एक महीने में गिरफ्तारी करने कहा था न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ देवा पारधी की मां द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस की हिरासत में हुई मौत के संबंध में दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई, 2025 को सीबीआई को इस घटना के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों को एक महीने के भीतर गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। आज मामले की सुनवाई में यह सब हुआ जस्टिस नागरत्ना ने कहा- ये सब दिखावा न्यायमूर्ति आर महादेवन ने कहा : आप उनके साथ मिलीभगत कर रहे हैं... आप अप्रैल से उनकी तलाश कर रहे हैं फिर भी आपने उन्हें निलंबित क्यों नहीं किया? दोनों अधिकारियों को बुधवार को निलंबित कर दिया गया था, जबकि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से अदालत के आदेश के बावजूद उन्हें पकड़ने और गिरफ्तार करने में नाकाम रहने पर सवाल उठाया था। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, कल क्यों? आप कहते हैं कि वे अप्रैल से फरार हैं। इसका मतलब है कि आप उन्हें बचा रहे हैं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे ने अदालत को बताया कि सीबीआई ने दोनों अधिकारियों का पता लगाने के लिए भौतिक निगरानी, ​​वित्तीय लेन-देन पर नजर रखने, टोल पर उनके वाहनों की तलाशी लेने और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच सहित कई कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन कदमों से कोई नतीजा नहीं निकला। पीठ सीबीआई के प्रयासों से संतुष्ट नहीं थी। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, इसका क्या मतलब है? यह सब दिखावा है। गिरफ्तारी का आदेश दिया तो अग्रिम जमानत कैसे? याचिकाकर्ता की वकील पायोशी रॉय ने सीबीआई के इस दावे का विरोध किया कि दोनों अधिकारियों का पता नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि अधिकारियों में से एक ने ग्वालियर में अपनी अग्रिम जमानत याचिका में एक हलफनामे पर हस्ताक्षर और नोटरी की थी। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है, तो अधिकारी अग्रिम जमानत याचिका कैसे दायर कर सकते हैं। उन्होंने पूछा, उनकी अग्रिम जमानत की सुनवाई का क्या हुआ? क्या आपने उनके वकील से बात की है? क्या राज्य अग्रिम जमानत में शामिल नहीं था? सरकारी वकील ने क्या सलाह दी थी? वे उन्हें गिरफ्तार कर सकते थे। रॉय ने इस बात पर जोर दिया कि सीबीआई के इस दावे के बावजूद कि वे फरार हैं, अधिकारियों को कल तक वेतन मिल रहा था। अधिकारी महीनों से ड्यूटी पर नहीं आ रहे, आप चुप हैं? न्यायमूर्ति महादेवन ने कहा : यह मध्य प्रदेश राज्य द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना ​​है। अधिकारी इतने महीनों से ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं और आप चुप हैं? इस पर राज्य के स्थायी वकील ने दलील दी कि जांच सीबीआई को सौंप दी गई है और गिरफ्तारी का निर्देश सीबीआई को दिया गया है। न्यायमूर्ति महादेवन ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य के गृह सचिव को पहले ही अवमानना ​​याचिका में पक्षकारों से हटा दिया गया था, फिर भी राज्य उस आदेश में पूरी तरह से पक्षकार है जिसकी अवमानना ​​का आरोप लगाया गया है। उन्होंने आगे कहा, ऐसा कोई आदेश नहीं था जिसके तहत केवल सीबीआई ही गिरफ्तार कर सके। अगर आपकी सरकार का कोई अधिकारी इसमें शामिल है, तो आप इससे पल्ला नहीं झाड़ सकते। शुक्रवार सुबह 10 बजे तक सुनवाई स्थगित मध्य प्रदेश राज्य के स्थायी वकील ने वेतन और फरार अधिकारियों के बारे में अदालत की चिंताओं को स्वीकार किया और निर्देश लेने के लिए समय मांगा। उनके अनुरोध पर, अंततः अदालत ने मामले की सुनवाई कल सुबह 10 बजे के लिए स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ठीक है, हम अभी कुछ नहीं कह रहे हैं। देखते हैं कल मध्य प्रदेश राज्य क्या कहता है। सबसे अच्छी बात जो आप कह सकते हैं, वह यह है कि 'हमने दोनों को गिरफ़्तार कर लिया है'। एक साल पुराना मामला मामला 15 जुलाई 2024 का है। बीलाखेड़ी के रहने वाले देवा पारदी (25) की बारात उसी शाम गुना शहर के गोकुल सिंह चक्क के लिए निकलने वाली थी। शाम 4.30 बजे म्याना पुलिस गांव पहुंची। देवा और उसके चाचा गंगाराम को बारात में जाने वाले ट्रैक्टर से ही थाने ले जाया गया। पुलिस का कहना था कि एक चोरी के केस में पूछताछ और बरामदगी करनी है। अगली ही शाम परिजनों को जिला अस्पताल से सूचना मिली कि एक पारदी युवक की लाश पोस्टमार्टम रूम में है। वहां पहुंचने पर परिजनों को देवा की मौत की जानकारी मिली। यह खबर भी पढ़ें... सुप्रीम कोर्ट बोला-CBI अपने लोगों को अरेस्ट नहीं कर पाती गुना में देवा पारदी की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में मंगलवार (23 सितंबर) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने आरोपी TI समेत पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी न करने पर CBI को फटकार लगाई। साथ ही चार्जशीट के जरूरी दस्तावेज सबमिट न करने पर भी नाराजगी भी जाहिर की है। पूरी खबर पढ़ें..... सीबीआई ने गुना से टीआई को हिरासत में लिया गुना के चर्चित देवा पारदी की कस्टडी में मौत के मामले में सीबीआई ने राघौगढ़ टीआई जुबेर खान को हिरासत में लिया है। हालांकि, सीबीआई ने इसकी पुष्टि नहीं की है। मंगलवार सुबह से ही टीम गुना में डेरा डाले हुई थी। देर रात टीआई को लेकर इंदौर रवाना हो गई। उन पर इस केस से संबंधित क्या आरोप हैं, यह स्पष्ट नहीं हो सका। पूरी खबर पढ़ें