मां के हत्यारे को फांसी की सजा:कोर्ट ने चार धर्मग्रंथों में दिए मां-बेटे के रिश्तों का जिक्र किया; कहा- ये दया का पात्र नहीं
मध्य प्रदेश के श्योपुर में विशेष अदालत ने मां की हत्या के आरोपी बेटे को फांसी की सजा सुनाई है। बेटे ने मां की संपत्ति हथियाने के लिए उसे मौत के घाट उतारा था। पहले छत से फेंका, फिर गला दबाया और शव को बाथरूम में दफना दिया था। 6 मई 2024 के इस मामले में बुधवार को विशेष न्यायाधीश एलडी सोलंकी ने फैसला सुनाते हुए कहा- आरोपी किसी भी दया का पात्र नहीं है। अपराध एक नृशंस प्रकृति का है। जिस मां ने एक बच्चे को अनाथाश्रम से गोद लेकर पाल-पोस कर बड़ा किया, उसी मां की संपत्ति के लिए हत्या करना केवल आपराधिक नहीं, बल्कि अमानवीय भी है। कोर्ट ने दीपक पचौरी को धारा 302 के तहत मृत्युदंड और 1000 रुपए का जुर्माना सुनाया। धारा 201 के तहत 7 साल की सजा और 1000 रुपए का अतिरिक्त जुर्माना लगाया। लोक अभियोजक राजेंद्र जाधव ने मध्यप्रदेश शासन की ओर से मामले की पैरवी की। अदालत ने फैसला सुनाते हुए रामचरित मानस, गुरुग्रंथ साहिब, कुरान और बाइबिल में दी गईं मां-बेटे के रिश्तों की मिसाल दी... शव को बाथरूम में दफनाने के बाद मामा को बुलाया
दीपक पचौरी ने 6 मई 2024 की सुबह जब उषा देवी तुलसी को जल चढ़ाने सीढ़ियां चढ़ रही थीं, तभी उन्हें धक्का दे दिया। घायल मां को लोहे की रॉड से मारा और साड़ी से गला घोंट दिया। शव को लाल कपड़े में लपेटकर घर के अंदर सीढ़ियों के नीचे बने बाथरूम में गड्ढा खोदकर दफना दिया, फिर ईंट से चुनाई कर दी। इसके बाद बाथरूम में कबाड़ा भर दिया। इसके दो दिन बाद आरोपी ने अपने मामा और रिश्तेदारों को बुलाया और कोतवाली थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी। पुलिस पूछताछ में उसकी बातों में विरोधाभास मिला। कड़ी पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। दंपती ने ग्वालियर के अनाथालय से गोद लिया था
उषा देवी के भाई अशोक शर्मा ने पुलिस को बताया था कि उषा और भुवनेंद्र पचौरी की कोई संतान नहीं थी। भुवनेंद्र वनकर्मी थे। उन्होंने ग्वालियर के एक अनाथालय से 3 साल के बच्चे को गोद लिया। इसका नाम दीपक रखा। दंपती ने दीपक को खूब पढ़ाया-लिखाया, लेकिन उसकी नीयत उषा की प्रॉपर्टी और दौलत पर बिगड़ गई। पिता की मृत्यु के बाद मिले 16.85 लाख रुपए उसने शेयर बाजार में गंवा दिए। मां के खाते में जमा 32 लाख रुपए पाने के लालच में उसने हत्या की योजना बनाई। पिता की मौत के बाद ऐश की जिंदगी जीने लगा
अशोक ने बताया कि 2021 में भुवनेंद्र की मौत के बाद दीपक (25) उनकी जमा पूंजी से नशा करता और ऐश की जिंदगी जीने लगा। वो ऐशो-आराम के लिए महीनों तक घर से बाहर रहा। उसके पास रुपए खत्म हो गए तो घर लौट आया। रुपए के लिए मां से झगड़ता था। उनके साथ मारपीट भी करता था। उषा के बैंक खाते में पति की सर्विस के लाखों रुपए जमा थे। 30 लाख रुपए की एफडी है। 2 लाख कैश और 8 लाख रुपए के जेवर हैं। श्योपुर शहर में उसका 2 मंजिला मकान है। महिला के पास कुल डेढ़ करोड़ रुपए की संपत्ति थी। 12वीं में हासिल किए थे 94% अंक
दीपक पचौरी को अनाथालय से श्योपुर स्थित अपने घर लाने के बाद उसके माता-पिता बने पचौरी दंपती ने उसे खूब पढ़ाया-लिखाया। 2018 में 12वीं क्लास में उसने 94% अंक हासिल किए थे। इसके बाद वह यूपीएससी के एग्जाम की तैयारी करने दिल्ली चला गया था। वह वारदात के एक दिन पहले 5 मई 2024 को ही दिल्ली से घर लौटा था। छह माह पहले मां को चूहा मार दवा खिलाकर मारने की कोशिश की
वारदात के बाद पुलिस पूछताछ में सामने आया था कि दीपक ने इस वारदात के छह माह पहले भी उषा की हत्या का प्रयास किया था, तब उसने मां को खाने में चूहा मार दवा खिलाई थी। उलटी होने पर उनकी जान बच गई, तभी से वह दीपक पर संदेह करने लगी थीं। पुलिस को इस बारे में भी परिवारवालों से जानकारी लगी।
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