दिल्ली एम्स में मार्च में धनखड़ को लगा था स्टेंट:बीपी की शिकायत, लगातार बोलने, खड़े रहने में आ रहे थे चक्कर, क्या यही इस्तीफे की वजह?
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर जगदीप धनखड़ ने हर किसी को चौंका दिया है। उन्होंने भले स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, लेकिन विपक्षी दावा कर रहे हैं कि इस्तीफे की वजह कुछ और ही है। दैनिक भास्कर ने इस्तीफे को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य को लेकर उनके रिश्तेदारों से बात की। साथ ही जाना कि क्या परिवार को जानकारी थी कि धनखड़ इस्तीफा देने वाले हैं? पढ़िए उनके साले प्रवीण बलवदा से बातचीत, जो पहले उनके अधीन हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते थे… भास्कर : क्या जगदीप धनखड़ के इस्तीफा देने का कारण स्वास्थ्य ही है? बलवदा : पिछले कुछ समय से जीजाजी (जगदीप धनखड़) का स्वास्थ्य काफी खराब चल रहा था। बीच में वे एम्स में भी भर्ती रहे थे। उसके बाद स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था, लेकिन अब कुछ समय से उनके ब्लड प्रेशर लो होने की शिकायत बनी हुई थी। दिल्ली, नैनीताल और कोटा में कार्यक्रम हुए, जिसमें उन्हें खड़े होकर बोलने में चक्कर आए थे। कोटा में उन्होंने बैठकर भाषण दिया था। लगातार चलने, खड़े होने और बोलने में काफी समस्या हो रही थी। डॉक्टर्स की राय भी थी कि उन्हें अब आराम करना चाहिए। ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी चाहिए। भास्कर : क्या उन्होंने इस्तीफा देने से पहले घर पर चर्चा की थी? बलवदा : बीच-बीच में जीजाजी का स्वास्थ्य काफी खराब हो रहा था। मेरी बड़ी बहन डॉ. सुदेश धनखड़ चाह रही थीं कि उन्हें आराम करना चाहिए। उन्होंने जीजाजी को काफी गंभीरता के साथ कहा था कि अब वे भागदौड़ नहीं करें। देर रात तक काम करना, लगातार ट्रैवल करना, ये ठीक नहीं है। मेरी बहन को डर भी लगा रहता था कि कहीं स्वास्थ्य में कोई परेशानी न हो जाए। भास्कर : उन्हें स्वास्थ्य संबंधी क्या समस्याएं थीं? बलवदा : मार्च में वे दिल्ली एम्स में भर्ती हुए थे। शायद 9 मार्च से 12 मार्च के बीच। तब मैं उनसे वहां मिलने भी गया था। अचानक चक्कर और घबराहट के कारण उन्हें भर्ती करवाया गया था। अस्पताल में ही आधी रात को भी उन्हें चक्कर आए। सीने में जकड़न सी महसूस होने के कारण घबराहट भी हो रही थी। डॉक्टरों ने तत्काल स्टेंट डाला। हालांकि इससे पहले भी उन्हें एंजियोग्राफी की सलाह दी जा रही थी। इसके बाद वे ठीक महसूस कर रहे थे, लेकिन बीपी की शिकायत लगातार रहने के कारण एक डर बना रहता है। भास्कर : क्या धनखड़ को कोई और बड़ा पद देने की तैयारी तो नहीं की जा रही? बलवदा : जीजाजी जब बीजेपी में आए तो उससे पहले वे एक्टिव पॉलिटिक्स में नहीं थे। उन्होंने लोकसभा या विधानसभा चुनाव के लिए कभी कोई टिकट नहीं मांगा। जब अमित शाह राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे, तब उन्होंने ही पहला राष्ट्रीय पद दिया था। उन्हें लीगल सेल का राष्ट्रीय संयोजक बनाया था। पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाने से पहले भी अमित शाह चाहते रहे कि वे कोई पद लें। उन्होंने खुद स्वीकार नहीं किया था। पद का जीजाजी को कभी लोभ नहीं रहा...एक वाकया है कि जब उन्हें गवर्नर बनाया तो मैं उनसे मिलने गया। मैंने उनसे पूछा कि आप शपथ कब लेंगे, उन्होंने कहा- क्या जल्दी है, आराम से ले लेंगे। अभी थोड़ा मुवक्किलों के कुछ काम हैं, सुप्रीम कोर्ट में जाना है बहस के लिए। उसके बाद राज्यपाल की शपथ ले लूंगा। पढ़ाने के लिए साले को रखा अपने साथ, पहले रहे राजनीति से दूरी धनखड़ के पास रहे थे हाई प्रोफाइल केस, कुछ में पर्दे के पीछे से की मदद .... जगदीप धनखड़ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... धनखड़ के इस्तीफे के बाद राजस्थान-भाजपा के लिए बड़ी चुनौती:किसी भी प्रमुख पद पर जाट नेता नहीं, कैबिनेट में 16, संगठन में 13 फीसदी हिस्सेदारी जगदीप धनखड़ के उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बीजेपी पर किसान कौम (जाटों) की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। पूरी खबर पढ़िए...
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