घोनेवाल बांध ने डुबोया अमृतसर:15 मिनट में आंखों के सामने जमा-पूंजी बही; 2 गांवों के 520 परिवार सिर पर छत मांग रहे
जम्मू-कश्मीर में इस साल तकरीबन 4 बार बादल फटे। औसत से 46 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई। इसका सबसे बड़ा असर पंजाब ने झेला। रावी में इतना पानी आया कि 1988 के रिकॉर्ड भी टूट गए। पठानकोट से लेकर फाजिल्का तक पूरी बॉर्डर बेल्ट पानी में डूब गई। 27 अगस्त 2025 की सुबह करीब चार बजे अमृतसर के घोनेवाल बांध का टूटना पूरे इलाके के लिए तबाही बनकर आया। गांव घोनेवाल और उससे सटे माछीवाड़ा के लोग अपने-अपने घरों में गहरी नींद में थे। अचानक गड़गड़ाहट और शोर सुनाई दिया- बांध टूट चुका है, अपनी जान बचाओ। पानी पलभर में गांव पर टूट पड़ा। लोगों के पास खुद को या अपने सामान को बचाने तक का वक्त नहीं था। मुश्किल से 15 मिनट मिले। किसी ने बच्चों को गोद में उठाया, कोई भागकर छत पर चढ़ गया, तो कोई गांव के बाहर ऊंचे टीलों पर जाकर बैठ गया। आंखों के सामने किसी का घर ढह गया, किसी का सामान लहरों में बह गया, और किसी ने अपने पशुओं को पानी में डूबते देखा। उसी दिन घोनेवाल के एक घर का वीडियो सामने आया। चारों तरफ से तेज रफ्तार पानी से घिरा घर और उसमें फंसा परिवार। आज वह घर पूरी तरह जर्जर हो चुका है। घर की मालकिन सुखजिंदर कौर पास ही एक बिस्तर पर बैठी रोते हुए कहती हैं- “कर्ज लेकर ये घर बनाया था। 28 लाख का कर्जा है। बेटा रातभर बांध को बचाने की कोशिश करता रहा, लेकिन 27 अगस्त की सुबह सबकुछ बह गया।” यहां दुख केवल सुखजिंदर कौर का ही नहीं है, गांव घोनेवाल और माछीवाड़ा के हर घर की यही कहानी है। दैनिक भास्कर एप की टीम ने शनिवार को दोनों गांवों के हालात का जायजा लिया तो ग्रामीणों के दुख का समंदर उनकी आंखों से बहता दिखता। ग्रामीणों को सबसे ज्यादा यही बात परेशान कर रही थी कि बाढ़ में सब कुछ तबाह हो गया, भविष्य कैसे सुरक्षित होगा। पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट... पहले PHOTOS में देखिए दोनों गांवों के हालात... ग्रामीणों की जुबानी, दोनों गांवों की त्रासदी की कहानी.... चमड़ी रोग के केस आ रहे हैं, कैंप लगाए गए
घोनेवाल में मेडिकल टीम के साथ कैंप लगा रहे डॉ. आज्ञापाल सिंह ने बताया कि अब जब बाढ़ का पानी उतरा है तो यहां बीमारियां फैलने का डर सताने लगा हैं। सबसे अधिक लोग चमड़ी रोग के आ रहे हैं। पानी उतरने के बाद अब हर कोई अपने खेतों में जा रहा है। पूरा दिन पानी में रहता है। इसके चलते उन्हें स्किन इन्फेक्शन हो रही हैं। डेंगू, मलेरिया के केस अभी सामने नहीं आए हैं। पानी कुछ समय अगर ऐसे ही आसपास रहा तो वे केस भी आने लगेंगे। फिलहाल यहां संस्थाएं मच्छर मारने की दवाएं और क्रीम आदी बांट रही हैं। 190 गांव प्रभावित, 5 लोगों की मौत, 134 घर तबाह
एडीसी रोहित गुप्ता ने बताया कि अब तक की रिपोर्टों के अनुसार अमृतसर जिले में 190 गांव बाढ़ की चपेट में आए हैं। इनमें रहने वाली करीब 1.35 लाख आबादी प्रभावित हुई है। इस दौरान 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 लोग घायल हैं और उनका इलाज जारी है। बाढ़ से 134 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और 18 पशुओं की मौत हुई है। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें :- पंजाब का पहला बाढ़ग्रस्त इलाका बाऊपुर, नाव से पहुंचा भास्कर:16 गांवों में पानी भरा, 350 घर डूबे, परिवार बेघर, सेना तैनात तारीख: 11 अगस्त 2025। यही वह दिन था, जब पंजाब का पहला जिला यानि कपूरथला बाढ़ की चपेट में आया। शुरुआत हुई सुलतानपुर लोधी के बाऊपुर क्षेत्र से, जहां कभी खेतों में गेहूं और धान लहलहाते थे, घरों के आंगन में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, आज वहां चारों ओर सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है। (पूरी खबर पढ़ें)
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