AIMIM का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज:सुप्रीम कोर्ट बोला- जातिगत आधार पर राजनीतिक पार्टी देश के लिए भी खतरनाक

AIMIM का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज:सुप्रीम कोर्ट बोला- जातिगत आधार पर राजनीतिक पार्टी देश के लिए भी खतरनाक
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जातिगत आधार पर बने राजनीतिक दल देश के लिए भी खतरनाक हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि AIMIM के संविधान के अनुसार इसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों समेत समाज के हर पिछड़े वर्ग के लिए काम करना है। इसका संविधान में भी उल्लेख है। याचिका तिरुपति नरसिम्हा मुरारी ने दाखिल की थी। इसमें 16 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने AIMIM के रजिस्ट्रेशन और और मान्यता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। मंगलवार को एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट के सामने दलीलें रखीं। बेंच ने एडवोकेट जैन से दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका वापस लेने को कहा। हालांकि बेंच ने याचिकाकर्ता को एक रिट याचिका दायर करने की छूट दी, जिसमें वह विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक दलों के संबंध में सुधारों के लिए अपील कर सकता है। याचिकाकर्ता की दलीलें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की बड़ी बातें... दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच ने AIMIM के रजिस्ट्रेशन और मान्यता को चुनौती देने वाली याचिका को 16 जनवरी को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पार्टी कानून के तहत अनिवार्य सभी जरूरतों को पूरा करती है। हाईकोर्ट ने 20 नवंबर को सिंगल जज बेंच के उस फैसले को सही बताया था, जिसमें कहा गया था कि याचिका में कोई दम नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता की दलीलें AIMIM सदस्यों के राजनीतिक विश्वासों और मूल्यों का समर्थन करती हैं। साथ ही राजनीतिक दल के मौलिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने के समान हैं। ये खबर भी पढ़ें... ओवैसी बोले- भारतीय मुस्लिम नागरिक नहीं बंधक हैं: हमें पाकिस्तानी, रोहिंग्या कहा जाता; रिजिजू ने कहा था- अल्पसंख्यकों को ज्यादा सुविधाएं मिलतीं AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारत के अल्पसंख्यक अब दूसरे दर्जे के नागरिक भी नहीं हैं। हम बंधक हैं। अगवा कर बांग्लादेश में फेंक दिया जाना क्या संरक्षण है। दरअसल, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने X पर लिखा था- भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों से ज्यादा सुविधाएं और सुरक्षा मिलती है। इसके जवाब में ओवैसी ने लिखा- आप (रिजिजू) भारत के मंत्री हैं, कोई सम्राट नहीं। सिंहासन नहीं संविधान के तहत पद पर बैठे हैं। अल्पसंख्यकों के अधिकार खैरात नहीं, मौलिक अधिकार हैं। हर दिन हमें पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, जिहादी या रोहिंग्या कहकर बुलाया जाना क्या कोई सुविधा है। पढ़ें पूरी खबर...