450 नरमुंडों वाली कांवड़, रात में डरावनी दिखती:20 लाख में बनी गोल्डन कांवड़, यूपी की ये 6 कांवड़ ट्रेंड में
कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है। करोड़ों कांवड़िए बम-बम भोले का जयघोष करते हुए हरिद्वार-दिल्ली नेशनल हाईवे से अपने गंतव्य को बढ़ रहे हैं। इस बार कुछ अलग दिखने वाली कांवड़ का ट्रेंड है। दिल्ली के कांवड़िए देवी-देवताओं के बड़े-बड़े स्टेच्यू वाली कांवड़ ला रहे हैं। कांवड़ियों की एक बड़ी संख्या कलश कांवड़ लाने वालों की है। ऑपरेशन सिंदूर और बुलडोजर जैसी कांवड़ भी ट्रेंड में हैं। इस बार बहुत सारे भक्त अपने कंधे पर भोलेशंकर के स्टेच्यू वाली कांवड़ रखकर भी लाए हैं। कांवड़ यात्रा में कौन-कौन सी कांवड़ ट्रेंड में हैं, रिपोर्ट में पढ़िए… बुलडोजर कांवड़ : योगी के शासन की तारीफ
मेरठ में सकौती टांडा गांव के कांवड़िए लगातार तीसरी बार बुलडोजर कांवड़ लेकर आ रहे हैं। बुलडोजर के आगे एक कांवड़िया कलश में 151 लीटर गंगाजल लेकर चल रहा है। उसके ठीक पीछे बुलडोजर चल रहा है। बुलडोजर के केबिन पर कुछ पोस्टर चिपके हुए हैं। इन पोस्टरों पर पीएम मोदी और सीएम योगी की तस्वीरें छपी हैं। पोस्टर के जरिए योगी शासन के बुलडोजर एक्शन की याद दिलाई जा रही है। ये कांवड़िए चाहते हैं कि अब देश की कमान योगी आदित्यनाथ संभालें, क्योंकि उन्होंने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था सुधारी है। इन कांवड़ियों की ये तीसरी बुलडोजर कांवड़ यात्रा है। गोल्डन कांवड़: 20 कांवड़ियों का जत्था खींच रहा
गुरुग्राम में गांव नाथूपुर के कांवड़िए इस बार गोल्डन कांवड़ लेकर आ रहे हैं। ये कांवड़ लोहे के बुग्गी जैसे स्ट्रक्चर के ऊपर मंदिर के आकार में सजाई गई है। इसके अंदर 151 लीटर गंगाजल रखा गया है। गर्भगृह में भगवान शिवशंकर की मूर्ति स्थापित है। करीब 20 कांवड़ियों का जत्था इस कांवड़ को खींचकर चलता है। कांवड़िया पुनीत बताते हैं- इस कांवड़ को तैयार करने में करीब 20 लाख रुपए का खर्च आया है। मंदिर के चारों तरफ गोल्ड जैसी दिखने वाली प्लेटें हैं। इसमें कुछ ओरिजिनल गोल्ड भी लगा हुआ है। ये कांवड़ 16 जुलाई को हरिद्वार से चली थी और 22 जुलाई को गुरुग्राम स्थित पैतृक गांव में पहुंच जाएगी, जहां पर जलाभिषेक होगा। गंगाजल की टंकी: 560 लीटर गंगाजल
हरियाणा के मेवात क्षेत्र निवासी धीरज देशवाल इस बार कलश या प्लास्टिक की कैन नहीं, बल्कि पूरी गंगाजल की टंकी भरकर ला रहे हैं। इस टंकी में 560 लीटर गंगाजल है, जो लोहे के स्ट्रक्चर से बने वाहन के ऊपर रखी हुई है। धीरज मोटे रस्सों को गले में डालकर इस वाहन को खींचकर हरिद्वार से मेवात लेकर जा रहे हैं। ये कांवड़ आकर्षण का केंद्र बनी है। उसकी वजह ये है कि जो टंकी घर-घर पानी सप्लाई करती है, उस टंकी में गंगाजल भरकर ले जाया जा रहा है। धीरज कहते हैं- ये पूरे गांव का गंगाजल है। पहले मैं खुद कई मंदिरों पर जलाभिषेक करुंगा। गांव वाले इस टंकी से गंगाजल लेकर जलाभिषेक कर सकते हैं। वो ये भी कहते हैं कि कांवड़ खंडित होने पर कांवड़िए उपद्रव न करें। मेरी टंकी से गंगाजल भरें और अपनी यात्रा जारी रखें। नरमुंडों वाली कांवड़: रात में रोशनी देते हैं 450 नरमुंड
इस कांवड़ पर चारों तरफ प्लास्टिक के 450 नरमुंड टंगे हैं। सबसे आगे शिवलिंग स्थापित है और सबसे ऊपर महादेव की मूर्ति रखी है। इनके चारों तरफ नरमुंड टंगे हैं। इस कांवड़ को लाने वाले हरियाणा के हिसार निवासी 25 कांवड़ियों का ग्रुप है। कांवड़िए बताते हैं- श्मशान घाट से ये आइडिया आया। जिस तरह वहां चिता जलती है। वहीं से आइडिया लेकर नरमुंडों की कांवड़ बना दी। दिल्ली में इस तरह के खांचे मिलते हैं। इन खांचों में प्लास्टिक को गला कर डाला, जिसके बाद प्लास्टिक के नरमुंड बन गए। इस पूरी कांवड़ पर लाइट लगाई हुई है। जब अंधेरा होता है तो हर एक नरमुंड खौफनाक रूप में दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर कांवड़: राष्ट्रप्रेम को समर्पित
पहलगाम टेरर अटैक के बाद हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम पर भी कांवड़ियों के कई ग्रुप कांवड़ लेकर आ रहे हैं। एक कांवड़ के आगे दो फौजियों के स्टेच्यू लगे हैं। इसमें एक जवान भारतीय सेना से है तो दूसरा वायुसेना से। इसके ऊपर ऑपरेशन सिंदूर का पोस्टर लगा है। ये कांवड़ यात्रा पहलगाम के शहीदों की याद में समर्पित की गई है। हरिद्वार पुलिस ने X पर इसका फोटो पोस्ट करते हुए लिखा- ऑपरेशन सिंदूर के नाम से कांवड़ लेकर निकले शिवभक्तों ने अपने जोश, श्रद्धा और राष्ट्रप्रेम से हर किसी का मन मोह लिया। मेरठ के कुछ कांवड़ियों ने भी ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर स्पेशल कांवड़ बनवाई है। वो हरिद्वार से मेरठ आकर प्राचीन औघड़नाथ महादेव मंदिर पर जलाभिषेक करेंगे। दिल्ली के विनय पहलवान पहलगाम हमले में मारे गए 27 लोगों की याद में 151 लीटर गंगाजल लेकर आ रहे हैं। कंधे वाली सबसे भारी कांवड़: 281 लीटर गंगाजल
मेरठ में मटौर गांव के नेशनल वेट लिफ्टर आदेश और सौरभ कंधे पर 281 लीटर गंगाजल लेकर आ रहे हैं। दावा है कि ये विश्व की सबसे भारी कांवड़ है, जो कंधों पर आ रही है। गंगाजल भरने के लिए स्पेशल कलश खासतौर पर जोधपुर, राजस्थान में बनवाए गए थे। एक कलश में करीब 45 लीटर गंगाजल भरा गया है। कांवड़ इतनी भारी है कि इन कांवड़ियों का सफर 15 जून से हरिद्वार से जारी है, जिसे एक महीना पूरा हो चुका है। ये कांवड़िए अभी मुजफ्फरनगर पहुंचे हैं। रोज सिर्फ 2 से 3 किलोमीटर ही चल पाते हैं। कांवड़िए कहते हैं कि अगर वो 23 जुलाई तक नहीं पहुंच पाए तो कोई बात नहीं, सावन महीने में कभी भी पैतृक गांव पहुंचकर मंदिर में जलाभिषेक कर देंगे। इस कांवड़ को रास्ते में लोगों ने कई मेडल भी दिए हैं। 300 रुपए से शुरुआत, लाखों में तैयार हो रही कांवड़
हर कांवड़ को बनाने का अलग रेट है। जो सामान्य लकड़ी की कांवड़ होती हैं, उनकी शुरुआत 300 रुपए से हो जाती है। सजावट के बाद ये कांवड़ 1500 से 2000 रुपए तक पड़ती है। इसे सजाने में लाल-पीले वस्त्र, भगवान शिव की मूर्ति, फोटो, त्रिशूल, डमरू, रुद्राक्ष आदि की जरूरत होती है। कई बार कांवड़िए खुद को भगवान शिव के रूप में ढालते हैं। इसके लिए उन्हें आर्टिफिशियल जटाएं, नरमुंडों की माला, आर्टिफिशियल सांप आदि की जरूरत पड़ती है। इस तरह के सामान की जरूरत 500 रुपए से शुरू हो जाती है। आजकल कलश कांवड़ का ट्रेंड है। कलश की कीमत उसके साइज से तय होती है। सबसे कम कीमत वाले कलश का जोड़ा 500 रुपए से शुरू हो जाता है। इस बार बहुत सारे कावंड़िए अपने कंधे पर भोलेशंकर का स्टेच्यू रखकर चल रहे हैं। ये स्टेच्यू 2000 रुपए से मिलने शुरू हो जाते हैं। इनकी कीमत भी साइज के हिसाब से तय है। लोहे के स्ट्रक्चर पर मंदिर का डिजाइन या देवी-देवताओं के बड़े-बड़े स्टेच्यू वाली कांवड़ सबसे महंगी हैं। इसमें स्ट्रक्चर कांवड़िए खुद तैयार करके हरिद्वार लेकर जाते हैं, जबकि उसके ऊपर सजावट वहीं होती है। इस सजावट की शुरुआत 50 हजार रुपए से होती है, जो 4-5 लाख रुपए तक जाती है। कांवड़ में धमाल मचाने वाला सार्जन DJ नहीं आया
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने इस बार कांवड़ और DJ की ऊंचाई के मानक तय कर दिए हैं। DJ की चौड़ाई 12 फीट और ऊंचाई 10 फीट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। जो DJ हर साल कांवड़ यात्रा में धमाल मचाते थे, इस बार उन्होंने दूरी बना ली है। इसमें प्रमुख नाम है झारखंड का डीजे सार्जन। इस बार वो कांवड़ यात्रा में अभी तक नहीं आया है। इस पूरे डीजे की कॉस्ट 10 करोड़ रुपए होती है, जिसका बुकिंग रेट 8-10 लाख रुपए होता है। डीजे बेस के लिए 60 स्पीकर लगे होते हैं। ऊंचाई घटने से कई बड़े-बड़े डीजे इस कांवड़ यात्रा में आए नहीं हैं। उत्तराखंड पुलिस ने ज्यादातर डीजे ऊंचे होने पर यूपी की सीमा में वापस भेज दिए। यूपी में ये डीजे मुजफ्फरनगर के पुरकाजी बॉर्डर पर खड़े हैं और मानक अनुसार ऊंचाई करने के बाद बज रहे हैं। कांवड़ियों का कहना है कि जिन डीजे की ऊंचाई मानक अनुसार 10 फीट है, उन्हें भी उत्तराखंड पुलिस अपने यहां एंट्री नहीं दे रही है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें... सांप ने 3 दिन में परिवार के 3 को काटा:मथुरा में अफवाह उड़ गई सांप बदला ले रहा है, कहां से शुरू हुई यह कहानी यूपी के मथुरा में सांप ने 3 दिन में एक परिवार के 3 लोगों को काट लिया। इसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि 2 लोग हॉस्पिटल में एडमिट हैं। 10 दिन से पूरा परिवार दहशत में है। पूरी रात बैठे-बैठे गुजर रही है। लोग दिन में घर से निकलते हैं। अंधेरा होने से पहले वापस आ जाते हैं। गांव के लोग भी इस अंधविश्वास में आ गए और सांप से बचने के लिए पूजा-पाठ कराने लगे। पढ़िए पूरी खबर...
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