हरियाणा में जिंदा बुजुर्ग को मृत बताया,VIDEO:श्मशान घाट ले जा रहे थे, अर्थी पर लिटाने से पहले अचानक हाथ-पैर हिले, आंखें भी खोलीं

हरियाणा में जिंदा बुजुर्ग को मृत बताया,VIDEO:श्मशान घाट ले जा रहे थे, अर्थी पर लिटाने से पहले अचानक हाथ-पैर हिले, आंखें भी खोलीं
हरियाणा के यमुनानगर में डॉक्टरों ने 75 साल के जिस व्यक्ति को मरा हुआ करार दिया, अचानक उसकी सांसें चल पड़ीं। उस वक्त श्मशान में उसके अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां तक लाई जा चुकीं थी। घर में रिश्तेदार विलाप कर रहे थे। उसे अर्थी पर लिटा श्मशान ले जाने की तैयारी थी। इससे पहले शरीर को शुद्ध करने के लिए नहलाया जा रहा था। जब परिजनों ने उसके मुंह से वेंटिलेटर की पाइप निकाली तो उसकी सांसें चल पड़ीं। पहले परिजनों को लगा कि उन्हें वहम हो रहा है। फिर उसने आंखें खोल लीं और एक गिलास पानी भी पिया। इसके बाद परिजन तुरंत दूसरे अस्पताल में ले गए। वहां के डॉक्टरों ने कबूला कि वह अभी जिंदा है। जिसके बाद उसका इलाज किया गया। हालांकि करीब 7 घंटे बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों ने जिंदा आदमी को मृत करार देने वाले अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला.... अस्पताल पर कार्रवाई हो, जिंदा रहते मृत घोषित किया भाई सतपाल ने कहा कि हम सभी सदमे में थे। डॉक्टरों ने तो उन्हें मृत घोषित कर दिया था, लेकिन अंतिम संस्कार से पहले भगवान ने चमत्कार कर दिखाया था। सतपाल ने कहा कि हम इस मामले में उस डॉक्टर के कार्रवाई की मांग करेंगे जिसने शेर सिंह को जिंदा होते हुए मृत घोषित कर दिया था। सतपाल ने बताया कि उनका भाई मजदूरी करता था। उसकी 3 बेटियां और एक बेटा है। SMO ने कहा- दोबारा कैसे जिंदा हुआ, पता नहीं इस बारे में छछरौली अस्पताल के SMO डॉ. वागिश गुटैन ने बताया कि जब भी किसी व्यक्ति को मृत घोषित किया जाता है तो उसकी पल्स, हार्ट रेट और ECG आदि टेस्ट किए जाते हैं। आदमी दोबारा कैसे जिंदा हो गया, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। इस बारे में अभी कोई शिकायत नहीं आई है। मौत को छूकर दोबारा जिंदा हुआ बुजुर्ग, साइंस या चमत्कार; वो सबकुछ जो जानना जरूरी है मरने के बाद दोबारा जिंदा होना चमत्कार या साइंस? जवाब: कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ जयेश दुबे बताते हैं कि चिता पर लिटाने के बाद अचानक से मुर्दें की सांसें चलना कोई चमत्कार नहीं साइंस है। जयेश यूके की हेल्थ न्यूज एजेंसी मेडिकल न्यूज टुडे की रिपोर्ट के हवाले से बताते हैं कि अमूमन किसी भी व्यक्ति की मौत दो तरह से होती है… 1. क्लीनिकल मौत इसमें व्यक्ति का दिल धड़कना बंद कर देता है। उसके फेफड़े सांस लेना बंद कर देते हैं और शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। उसकी नब्ज, दिल की धड़कन और सांस लेने की प्रोसेस देखकर पता लगाया जाता है कि वह जिंदा है या नहीं। क्लीनिकल मौत के बाद भी व्यक्ति का दिमाग 10 मिनट तक काम करता है। कुछ मामलों में उस व्यक्ति को सेरेब्रल परफॉर्मेंस कैटेगरी (CPR) देकर दोबारा जिंदा किए जाने के चांस होते हैं। आसान भाषा में समझें तो क्लीनिकल मौत में दोबारा जिंदा होने की उम्मीद होती है। 2. बायोलॉजिकल मौत इसमें व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। दिमाग शरीर के किसी भी हिस्से में सिग्नल नहीं पहुंचा पाता। इसमें व्यक्ति की धड़कनें रुक जाती हैं। ऐसे मामले में न सीपीआर काम करता है न और कोई मैथड। कुल मिलाकर व्यक्ति मर जाता है। डॉक्टर इन दोनों मामलों में व्यक्ति को मृत घोषित कर देते हैं, लेकिन क्लीनिकल मौत में कुछ व्यक्ति दोबारा जिंदा हो जाते हैं। इसकी वजह लाजारस सिंड्रोम है। 1982 में इसे पहली बार मेडिकल रिसर्चर के. लिंको ने पहचाना था। 11 साल बाद मेडिकल साइंटिस्ट जे. जी. ब्रे ने मौत के बाद दोबारा जिंदा होने की प्रोसेस को ‘लाजारस सिंड्रोम’ नाम दिया। ब्रे ने लाजारस नाम बाइबल की एक कहानी से लिया। बाइबल के चैप्टर 11 की वर्स 1 से 45 के मुताबिक, यरूशलम के पास बेथनी में लाजर नाम के एक शख्स रहते थे। साथ ही उनकी दो बहनें मार्था और मरियम भी रहती थीं। यीशू को लाजर से काफी स्नेह था। एक दिन बीमारी की वजह से लाजर की मौत हो गई। तब यीशू बेथनी से बाहर गए हुए थे। लाजर की मौत के 4 दिन बाद यीशू वापस लौटे तो उन्हें लाजर की मौत की जानकारी मिली। यीशू लाजर की कब्र के पास पहुंचे और उन्हें जिंदा कर दिया। सवाल- क्या है मरे लोगों को दोबारा जिंदा करने वाला लाजारस सिंड्रोम? जवाब: अमेरिकी मेडिकल न्यूज वेबसाइट ‘हेल्थ लाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, लाजारस सिंड्रोम तीन वजहों से होता है… 1. एयर ट्रैपिंग: लाजारस सिंड्रोम की सबसे बड़ी वजह एयर ट्रैपिंग या फेफड़ों में हवा का फंसना है। जब CPR के दौरान किसी व्यक्ति के फेफड़ों में बहुत तेजी से हवा जाती है, तो उसे बाहर निकलने का समय नहीं मिलता। हवा फेफड़ों में जम जाती है, जिसे एयर ट्रैपिंग कहा जाता है। जैसे-जैसे फेफड़ों में हवा बढ़ती है, छाती पर दबाव बढ़ता जाता है। इससे खून को छाती की नसों से होते हुए दिल तक पहुंचने में मुश्किल होती है। इस वजह से व्यक्ति की नब्ज और दिल की धड़कन बंद हो जाती है। उसका शरीर मृत व्यक्ति की तरह कोई भी हरकत नहीं करता। जब धीरे-धीरे ये हवा बाहर निकलती है, तो शरीर नॉर्मल होने लगता है। छाती पर दबाव कम होने पर हार्ट फिर से शरीर में ब्लड पंप करना शुरू कर देता है, जिससे मरा हुआ व्यक्ति जिंदा हो जाता है। 2. मेडिकेशन रिएक्शन में देरी: इसमें CPR के दौरान दी जाने वाली दवाओं का रिएक्शन बहुत देर से होता है। जब किसी व्यक्ति को ज्यादा दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा जाता है, तो उसके शरीर में दवाओं के असर करने की प्रोसेस भी धीमी हो जाती है। CPR के दौरान दी जाने वाली एड्रेनालाईन जैसी दवाएं बहुत देर से असर करती हैं। 3. डिफिब्रिलेशन के रिएक्शन में देरी: जब किसी व्यक्ति की क्रिटिकल कंडीशन होती है, तो CPR काम नहीं करता। ऐसे में हार्ट को दोबारा एक्टिव करने के लिए छाती पर डिफिब्रिलेटर मशीन के जरिए से करंट के झटके दिए जाते हैं। कई बार हार्ट पर इन झटकों का असर होने में कई घंटों का समय लग जाता है। ऐसे में जब शरीर दोबारा रिएक्ट करता है तो इसे लाजारस सिंड्रोम कहते हैं। ऐसा एक मामला मई 2021 में सामने आया था। तब पुणे में 78 साल की शकुंतला गायकवाड़ को कोरोना की वजह से मृत घोषित कर दिया गया था। अंतिम संस्कार के दौरान वे अचानक उठीं और चिता पर बैठकर रोने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि यह CPR और दवाओं के धीमे रिएक्शन की वजह से हुआ होगा। सवाल: क्या इस सिंड्रोम से दोबारा जिंदा होने वाले लोग स्वस्थ रहते हैं? जवाब: अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर इन्टरवेन्शनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. किसलय श्रीवास्तव बताते हैं, लाजारस सिंड्रोम से दोबारा जिंदा होने वाले लोग ज्यादा दिनों तक जीवित नहीं रह पाते। यहां तक कि CPR के बाद जिंदा होने वाले लोगों की उम्र भी ज्यादा नहीं होती। इन मामलों में ब्रेन ज्यादा डैमेज हो जाता है। क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, 1982 से 2018 तक लाजारस सिंड्रोम के 65 मामले दर्ज हुए। इनमें से 18 लोग पूरी तरह स्वस्थ हो गए। वहीं, 47 लोगों की फौरन या थोड़े समय में ही दोबारा मौत हो गई। स्कैंडिनेवियन जर्नल ऑफ ट्रामा और रिससिटेशन एंड इमरजेंसी मेडिसिन की रिसर्च के मुताबिक, लाजारस सिंड्रोम से दोबारा जिंदा हुए व्यक्तियों में 30% लोगों की अच्छी रिकवरी हुई है। वहीं, 70% मामलों में व्यक्ति की दोबारा मौत हो जाती है।’ अगस्त 2013 में अमेरिका के ओहियो में 37 साल के एक व्यक्ति घर में गिर गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें 45 मिनट तक CPR दिया, लेकिन उनके शरीर ने कोई हरकत नहीं हुई। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके 15 मिनट बाद उनकी सांसें दोबारा चलने लगी। एक हफ्ते तक उनका अस्पताल में इलाज चला, जिसके बाद वे पूरी तरह से ठीक हो गए। सवाल: लाजारस सिंड्रोम और मौत में डॉक्टर क्यों फर्क नहीं कर पाते? जवाब: डॉ. किसलय श्रीवास्तव बताते हैं, ‘सभी डॉक्टर CPR देने के 10 से 45 मिनट बाद तक सांस वापस आने का इंतजार करते हैं। आमतौर पर इस दौरान सांस वापस आ जाती है, लेकिन कुछ खास मामलों में कई घंटों बाद भी मरीज की सांसें लौट आती हैं। इस कारण डॉक्टर्स लाजारस सिंड्रोम और मौत में फर्क नहीं कर पाते।’ दरअसल, शरीर में पोटेशियम लेवल और ब्लड में एसिड ज्यादा होने की वजह से भी हार्टबीट रुक जाती है। इसके बाद मरीज को CPR दिया जाता है। कई बार CPR देने के कई घंटों बाद रिकवरी होना शुरू होती है। इस दौरान अपने आप ब्लड सर्कुलेशन शुरू हो जाता है और धड़कनें चलने लगती हैं। डॉ. किसलय श्रीवास्तव ने कहा, लाजारस सिंड्रोम की सटीकता से पहचान करने के लिए टेक्नोलॉजी की कमी है। तब तक सभी डॉक्टर्स को किसी भी मरीज को मृत घोषित करते समय ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। **************** ये खबर भी पढ़ें.... हरियाणा के अस्पताल में जिंदा महिला को मृत बताया:पोस्टमॉर्टम करने वाला डॉक्टर बोला-इसकी तो सांसें चल रहीं हरियाणा में फरीदाबाद के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों ने जिंदा महिला को मुर्दा बता दिया। इसका खुलासा तब हुआ, जब परिजन लाश लेकर पोस्टमॉर्टम करवाने के लिए पहुंचे। वहां पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने कहा कि महिला तो अभी जिंदा है। उसके शरीर में हलचल है। सांसें भी चल रही हैं (पूरी खबर पढ़ें)