चंडीगढ़ में स्पाइसजेट पर ₹10 हजार जुर्माना:यात्री का सामान अहमदाबाद की बजाय भेजा बैंगलोर, कोर्ट ने माना सेवा में लापरवाही

चंडीगढ़ में स्पाइसजेट पर ₹10 हजार जुर्माना:यात्री का सामान अहमदाबाद की बजाय भेजा बैंगलोर, कोर्ट ने माना सेवा में लापरवाही
दिल्ली से अहमदाबाद जा रहे एक यात्री का सामान गलत जगह भेजने पर चंडीगढ़ की कंज्यूमर कोर्ट ने स्पाइसजेट एयरलाइंस को सेवा में कोताही का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने एयरलाइंस को 10,000 रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता साहब पायल, जो कि सेक्टर-47C, चंडीगढ़ के निवासी हैं, ने बताया कि वह गुजरात फ्लाइंग स्कूल, वडोदरा में परीक्षा देने जा रहे थे। इसके लिए उन्होंने दिल्ली से अहमदाबाद तक का टिकट स्पाइसजेट से बुक किया था। लेकिन यात्रा के दौरान उनका सामान किसी और जगह भेज दिया गया, जिससे उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद माना कि एयरलाइंस की लापरवाही के कारण शिकायतकर्ता की सेवा में बाधा आई और इसके लिए स्पाइसजेट को हर्जाना अदा करना होगा। अहमदाबाद पहुंचे तो नहीं मिला सामान शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने निर्धारित तिथि पर दिल्ली से अहमदाबाद की यात्रा की, लेकिन जब वे अहमदाबाद पहुंचे तो देखा कि उनका सामान गायब था। उन्होंने एयरलाइंस स्टाफ को तुरंत जानकारी दी, तो उनसे अनियमितता रिपोर्ट (IR) दर्ज करने को कहा गया। पायल ने बताया कि उन्हें तत्काल वडोदरा के लिए रवाना होना था, लेकिन सामान नहीं मिलने के कारण उन्हें बिना सामान के टैक्सी से वडोदरा एयरपोर्ट के लिए निकलना पड़ा। अगले दिन उन्हें बताया गया कि सामान गलती से बैंगलोर भेज दिया गया है और 2 दिन में लौटा दिया जाएगा। एयरलाइंस ने दी सफाई, कोर्ट ने नहीं माना स्पाइसजेट एयरलाइंस ने जवाब में कहा कि यात्रियों या सामान की देरी से डिलीवरी के लिए वह जिम्मेदार नहीं है। एयरलाइंस ने वायु परिवहन अधिनियम, 2012 के नियम 13(3) का हवाला दिया और कहा कि यदि सामान 7 दिनों के भीतर वापस कर दिया गया है, तो सेवा में कमी नहीं मानी जा सकती। उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता को दो दिन के भीतर सामान वापस कर दिया गया था, इसलिए वह हर्जाने के पात्र नहीं हैं। हालांकि, कंज्यूमर कोर्ट ने एयरलाइंस की दलीलें खारिज कर दीं और माना कि यात्री को बिना सामान के वडोदरा जाना पड़ा, जिससे उन्हें भारी असुविधा हुई। कोर्ट ने कहा कि यह सेवा में लापरवाही का मामला है, और इसके चलते पीड़ित को मानसिक परेशानी हुई।