घर से क्लीनिक गई युवती अचानक हो गई थी लापता:डेढ़ महीने तक घर वालों से बात नहीं, सिर्फ आते थे मैसेज
4 साल की युवती दांतों के एक डॉक्टर के यहां सहायक के तौर पर काम करती थी। रोजाना सुबह 10 बजे ड्यूटी के लिए घर से जाती और दोपहर में खाना खाने के लिए घर आती। लंच के बाद दोबारा ड्यूटी पर चली जाती और रात करीब 9 बजे वापस घर लौटती। बीते करीब दो साल से यही सिलसिला चल रहा था। साथ-साथ उसकी एलएलबी की पढ़ाई भी जारी थी। एक दिन वो सुबह घर से ड्यूटी के लिए गई। लंच करने दोपहर में घर आई। शाम को 4 बजे यह कहकर निकली की क्लीनिक जा रही हूं। रात हो गई। युवती के घर पहुंचने का टाइम भी हो गया मगर वो नहीं पहुंची। इसके बाद अगले डेढ़ महीने तक उसकी घर वालों से बात नहीं हुई, लेकिन मोबाइल फोन पर मैसेज आते रहे। आखिर क्या हुआ उस युवती के साथ? मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स में इस बार बात सतना के उस चर्चित केस की, जिसकी कहानी ने सभी को चौंका दिया था। पढ़िए ये रिपोर्ट... मध्यप्रदेश के सतना में रामनरेश और रुकमीना केवट का परिवार रहता था। उनकी चार बेटियां रानू, भानू, आरती, लक्ष्मी और एक बेटा सागर थे। रानू और आरती की शादी हो चुकी थी। चार बहनों में दूसरे नंबर की भानू शहर के एक प्राइवेट कॉलेज में एलएलबी स्नातक की छात्रा थी, जो अपनी पढ़ाई के खर्च और निजी जरूरतों के लिए नौकरी की तलाश में थी। पिता रामनरेश फर्नीचर का काम करते थे। बेटी भानू नौकरी कर घर खर्च में पिता का हाथ बंटाना चाहती थी, इसलिए वो पढ़ाई के साथ साथ नौकरी की तलाश शुरू कर देती है। उसे घर के पास डॉ. आशुतोष त्रिपाठी के क्लीनिक में नौकरी के बारे में पता चला। उसने परिवार वालों को बताया कि कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। पास ही में नौकरी मिल रही है। घर वाले इस पर राजी हो जाते हैं। वो क्लीनिक जॉइन कर लेती है। काम ज्यादा मुश्किल नहीं था। भानू तो नौकरी करना चाहती ही थी, इसलिए वो तुरंत तैयार हो जाती है। डॉ. त्रिपाठी उसकी सैलरी 3 हजार रुपए तय कर देते हैं। रिसेप्शन के साथ नर्स का काम भी करने लगी
कुछ ही दिनों में भानू ने पूरा काम संभाल लिया था और बहुत अच्छे से सब कुछ मैनेज करने लगी थी। अब भानू रिसेप्शन के साथ-साथ डॉ. त्रिपाठी के साथ मिलकर नर्स का भी काम करने लगती है। जो भी पेशेंट आते उनके इलाज में डॉ. त्रिपाठी का सहयोग करती। सब बढ़िया चलने लगा। रात 9 बजे तक भानू घर भी आ जाती थी। कभी-कभी लेट होने पर डॉ. त्रिपाठी खुद उसे छोड़ने के लिए घर तक आते थे। डेढ़ महीने तक नहीं चला बेटी का पता
तारीख- 14 दिसंबर 2020। रोज की तरह भानू घर से लंच के बाद शाम को क्लीनिक जाने का कहकर गई, लेकिन रात को वापस घर नहीं लौटी। परिजनों ने उसे फोन किया, लेकिन फोन नहीं लगा। घरवालों की घबराहट और बढ़ गई। वे उसे ढूंढने लगे। घर के आसपास कोतवाली थाना क्षेत्र सहित रिश्तेदारों ने हर संभव जगह तलाश की। घर वाले बेटी से बात करना चाहते थे, लेकिन बात नहीं हो पा रही थी। हालांकि डॉक्टर के बताने के बाद कि भानू ठीक है, घर वालों ने राहत की सांस ली। डॉक्टर ने भानू के घर से लिया दूसरा फोन
घर वाले भानू को फोन कर रहे थे, लेकिन रिंग नहीं जा रही थी। इस बीच डॉ. आशुतोष भानू के घर जाते हैं और कहते हैं कि उसे भानू ने भेजा है। शायद उसका फोन खराब हो गया है। आप उसके लिए एक नया फोन दे दें ताकि वो आपसे बात कर सके। घर वाले डॉक्टर को एक फोन दे देते हैं। डॉक्टर भरोसा दिलाता है कि बेटी बहुत अच्छी जगह नौकरी करने गई है। आप लोग चिंता न करें। डॉक्टर वहां से चले जाते हैं। फिर भानू के मैसेज आने लगे
बाद में बहन लक्ष्मी के पास भानू का मैसेज आता है। लिखा था- तुमने खाना खा लिया? तुम पापा-मम्मी का ध्यान रखना। बड़ी बहन लक्ष्मी माता-पिता को बताती है कि भानू ठीक है। अच्छी जगह नौकरी कर रही है। घर वालों ने पूछा कि नौकरी कहां पर कर रही है तो इसका जवाब नहीं आया था। एक दिन डॉक्टर भानू के माता-पिता और बहन को क्लीनिक पर बुलाते हैं। भानू की तरक्की के बारे में बताते हैं। घर वाले पूछते हैं कि बेटी कहां है। इस पर डॉक्टर कहते हैं कि आपकी बेटी ने मना किया है कि वो पहले पैसे कमा ले। अच्छी तरक्की कर ले। वो खुद आपके पास आकर सब कुछ बताएगी कि कहां है, किस पोस्ट पर है। बाद में फिर बड़ी बहन के पास भानू के मैसेज आते हैं, जिसमें वो कहती है कि वो बाहर जा रही है। उसने खाना खा लिया है। पिता और बहन संतुष्ट हो जाते हैं। हालांकि मां रुकमीना परेशान रहने लगी। डेढ़ महीने तक बेटी भानू के बारे में घर वाले पता लगाते रहे, मगर इस बारे में कोई सुराग नहीं मिलता है कि वो कहां है। बस मैसेज पर बात होती है। आखिरकार परेशान होकर परिजनों ने करीब डेढ़ महीने बाद बेटी के लापता होने की जानकारी पुलिस को दी। 1 फरवरी 2021 को रुकमीना केवट कोतवाली थाने पहुंची और गुमशुदगी दर्ज करवाई। डॉक्टर ने बताया - शादी तय होने के बाद से परेशान थी भानू
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सतना की कोतवाली पुलिस ने डॉक्टर आशुतोष त्रिपाठी से भानू के बारे में पूछा। इस पर डॉक्टर ने पुलिस को बताया कि युवती ने उसके क्लीनिक में थोड़े समय के लिए काम किया था। फरवरी 2020 में भानू केवट की शादी ब्रह्मेश केवट के साथ तय हुई थी। 22 मार्च 2020 से जुलाई 2020 तक कोरोना के कारण उसकी क्लीनिक पूरी तरह से बंद थी। 1 अगस्त 2020 से 30 नवंबर 2020 के बीच भानू कभी भी नियमित रूप से उसके क्लीनिक नहीं आई। वह नियमित नहीं थी और ड्यूटी से अकसर गैरहाजिर रहती थी। भानू से अनुपस्थिति का कारण पूछने पर उसने बताया था कि उसके घर में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जब से उसने 12 फरवरी 2020 को ब्रह्मेश केवट से शादी करने से मना किया तब से उसका भाई सागर केवट और ब्रह्मेश केवट उसके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। घर में होने वाली कलह से उसका मन ऊब गया है। डॉक्टर ने कहा- मुझे नहीं पता भानू कहां है
पुलिस ने डॉक्टर से लंबी पूछताछ की। पुलिस की कोशिश थी कि घर और क्लीनिक के बीच लापता हुई भानू की गुमशुदगी का कोई सुराग मिले। पुलिस लापता युवती को ढूंढने में लगी थी, मगर कोई ठोस सुराग अभी तक हाथ नहीं लगा था। इधर, भानू की मां रुकमीना बेटी के लिए परेशान थी। रिपोर्ट लिखवा दी थी मगर बेटी कहां है, कैसी है और किस हालत में ये सोच-सोचकर कर वो बेचैन रहने लगी। मां ने एक दिन सीएम हेल्पलाइन में भी बेटी के गुम होने की शिकायत कर दी। लिखा कि पुलिस हमारी मदद नहीं कर रही है। सीएम ऑफिस से फोन पुलिस के पास जाता है और गुमशुदा युवती का पता जल्दी लगाने के लिए कहा जाता है। पुलिस हरकत में आती है, लेकिन केस में कोई क्लू पुलिस को नहीं मिल रहा था। पुलिस भानू की कॉल डिटेल निकलवाती है। भानू की जब कॉल डिटेल की लिस्ट सामने आती है तो पुलिस को एक महत्वपूर्ण क्लू हाथ लगता है, जिसमें पता चलता है कि आखिरी बार भानू की किससे बात हुई थी। क्राइम फाइल्स के पार्ट 2 में जानिए इन सवालों के जवाब - 14 दिसंबर 2020 को ऐसा क्या हुआ कि युवती गायब हो गई? - लापता भानू की कॉल डिटेल में आखिरी फोन कॉल किसका था? - क्या जिसका आखिरी कॉल था वही कातिल था या कोई और? - युवती कहां और किस हालत में मिली? - दृश्यम फिल्म की तरह कैसे पुलिस को गुमराह किया गया? - केस का अंजाम क्या हुआ? ये भी पढ़ें... जेल में घुसकर हत्यारे को मारी थी गोली: 18 साल पहले इंदौर में गार्ड रूम तक रिवॉल्वर लेकर पहुंचे थे बदमाश मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स में इस बार बात इंदौर जेल में हुए चर्चित हत्याकांड की। 18 साल पहले दिन दहाड़े जेल में खूनी वारदात हुई। बदमाशों ने ट्रेड यूनियन नेता विष्णु उस्ताद की हत्या के आरोप में बंद कैदी जीतू ठाकुर उर्फ जितेंद्र सिंह पिता माधव सिंह उम्र 35 साल निवासी नंदानगर, इंदौर को गोली मारकर मौत के घाट उतारा और फरार हो गए। पढ़ें पूरी खबर... पुलिस बोली-पिता की हत्या का बदला लेने रची थी साजिश: जेल में कराया आरोपी का मर्डर, बेटा बोला- मैं 400 किमी दूर जेल में था मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट 1 में आपने पढ़ा कि किस तरह इंदौर के पास महू उप जेल में जीतू ठाकुर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जीतू ठाकुर ट्रेड यूनियन नेता विष्णु उस्ताद की हत्या के आरोप में जेल में बंद था। पुलिस जीतू की हत्या करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार कर लेती है। पुलिस ने कितने लोगों को आरोपी बनाया? आखिर जीतू की हत्या क्यों की गई थी? पढ़ें पूरी खबर...
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