किसान ने अनाज से बनाया शुभांशु का पोट्रेट:18 दिन अंतरिक्ष में रहने के बाद लौटे; धान-तिल, बाजरा जैसे अनाज किए इस्तेमाल

किसान ने अनाज से बनाया शुभांशु का पोट्रेट:18 दिन अंतरिक्ष में रहने के बाद लौटे; धान-तिल, बाजरा जैसे अनाज किए इस्तेमाल
करीब तीन हफ्ते इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में रहने के बाद भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला आज मंगलवार को पृथ्वी पर लौट आए हैं। उनका स्पेस शटल अटलांटिक महासागर में उतरेगा। शुभांशु के लौटने की खुशी पूरे देश में जताई जा रही है। इसी कड़ी में नर्मदापुरम जिले के सुपल्ली गांव के किसान योगेंद्र सोलंकी ने भी एक खास अंदाज में यह पल मनाया है। उन्होंने शुभांशु शुक्ला और उनके तीन साथी यात्रियों के अनाज से पोट्रेट तैयार किए हैं। सोलंकी ने शुभांशु के अलावा अमेरिका की पैगी विलसन, पोलैंड के सवोस उज्जानवास्की और हंगरी के टेगो कापूर के पोट्रेट बनाए हैं। इनको सोमवार शाम को शुभांशु के पृथ्वी पर लौटने से ठीक एक दिन पहले जारी किया गया। योगेंद्र सोलंकी ने बताया कि उन्होंने अंतरिक्ष उड़ान के दिन से ही इनके पोट्रेट बनाना शुरू कर दिया था। अनाज से पोट्रेट बनाने का उद्देश्य योगेंद्र सोलंकी का कहना है- भारत एक कृषि प्रधान देश है। मेरा उद्देश्य यह है कि लोग अनाजों का महत्व समझें इसलिए मैंने अंतरिक्ष से लौट रहे यात्रियों का स्वागत अनाजों से बनी तस्वीरों से ही किया है। इन अनाजों का किया इस्तेमाल पोट्रेट बनाने में किसान सोलंकी ने धान, तिल, बाजरा, रागी, अलसी, राजगिरा और खस-खस जैसे अनाजों का उपयोग किया है। वे पिछले 5 वर्षों से अनाजों से पोट्रेट तैयार कर रहे हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के पोट्रेट बना चुके हैं। बिना किसी सहायता खुद बनाते हैं पोट्रेट योगेंद्र सोलंकी पोट्रेट स्वयं के खर्चे पर बनाते हैं। वे अपनी कलाकारी के लिए अब प्रदेशभर में पहचाने जाने लगे हैं। घर के आंगन में उन्होंने किसान देवता की प्रतिमा स्थापित कर मंदिर बनाया है, जहां वे रोज सुबह-शाम पूजा भी करते हैं।