उज्जैन में खाप पंचायत जैसा फैसला, पुजारी का बहिष्कार किया:तीन बच्चों को स्कूल से निकाला; पूजा कराने, बाल काटने, मजदूरी करने पर भी रोक
उज्जैन के झलारिया पीर गांव में खाप पंचायत जैसी सामाजिक बैठक में मंदिर के पुजारी और उनके परिवार पर बहिष्कार कर दिया गया। उसके बच्चों की पढ़ाई से लेकर पूजा, कटिंग और मजदूरी तक पर रोक लगा दी गई। पंचायत के फैसले का उल्लंघन करने वालों पर 51 हजार रुपए जुर्माने की चेतावनी दी गई है। गांव के नागराज मंदिर परिसर में पूर्व पंचायत मंत्री गोकुल सिंह देवड़ा ने पंचायत का फैसला माइक पर पढ़कर सुनाया। यहां बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ग्रामीणों ने हाथ उठाकर सहमति जताई। एक व्यक्ति ने बच्चों को स्कूल से निकलवाने के निर्णय का विरोध किया। इस पर पंचायत ने कहा कि कुछ लोगों का सुझाव आया था, बच्चों को स्कूल से बाहर करवा दें, इसलिए इसे फैसले में शामिल किया है। इस घटना के बाद पुजारी पूनमचंद चौधरी ने कलेक्टर से शिकायत की है, जिस पर जांच के आदेश दिए गए हैं। मंदिर की जमीन और पुजारी को हटाने का विवाद
करीब 4 हजार की आबादी वाले झलारिया पीर गांव में देव धर्मराज मंदिर की देखरेख पूनमचंद चौधरी का परिवार वर्षों से करता आ रहा है। मंदिर से लगी करीब 4 बीघा जमीन पर पुजारी खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। परिवार के मुताबिक कुछ ग्रामीण मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार के नाम पर चंदा इकट्ठा कर लिया, लेकिन उसी राशि से मंदिर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की जा रही है, जिसका पुजारी परिवार ने विरोध किया। पुजारी के बेटे मुकेश चौधरी ने बताया कि विरोध के बाद उन्हें और परिवार को निशाना बनाकर गांव के प्रभावशाली लोगों ने 14 जुलाई को पंचायत बुलाकर बहिष्कार का फरमान सुना दिया। बहिष्कार के बाद बच्चों को स्कूल से निकाला
पुजारी के बेटे ने बताया कि पंचायत के फैसले के अगले दिन तीनों बच्चों 13 वर्षीय संध्या (8वीं), 10 वर्षीय सतीश (5वीं) और 6 वर्षीय विराट (3वीं) को स्कूल से निकाल दिया गया। तीनों गांव के प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आपके परिवार का विवाद चल रहा है, इसलिए हम बच्चों को नहीं पढ़ा सकते। प्राचार्य का कहना है कि उन्होंने पंचायत की ओर से कराई गई मुनादी सुनकर बच्चों को स्कूल से बाहर निकाला है। बुलाया था, नहीं आए, इसलिए फैसला सुनाया
वीडियो में माइक पर फरमान पढ़ते नजर आए पूर्व पंचायत मंत्री गोकुल सिंह देवड़ा ने कहा कि यह मंदिर सार्वजनिक है और गांव के लोगों ने चंदा इकट्ठा कर जीर्णोद्धार के लिए 6 लाख रुपए जुटाए हैं। पुजारी को कई बार समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वे नहीं माने और कोर्ट चले गए। 14 जुलाई को पंचायत में बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं आए और चौकीदार को भी भगा दिया। इसके बाद सर्व समाज की बैठक में यह फैसला लिया गया। गोकुल सिंह ने यह भी कहा कि मंदिर की जमीन का मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इसका फैसला कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद ही किया जाएगा। कलेक्टर से शिकायत, जांच के आदेश जारी
पुजारी पूनमचंद चौधरी ने उज्जैन कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बताया कि उनका परिवार सामाजिक बहिष्कार का शिकार हो रहा है। उन्हें किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जा रहा, बच्चों की पढ़ाई बंद कर दी गई और मजदूर तक काम करने नहीं आ रहे। कलेक्टर ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। इस खबर पर आप अपनी राय दे सकते हैं...
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