अब मंत्री शाह बोले-विधायक सगी बहन क्या मैं चुंबन लूंगा:विजयवर्गीय ने कहा-मैंने विदेशी संस्कृति की बात की, मैं भी बहन का माथा चूमता हूं
'आज के हमारे प्रतिपक्ष के नेता ऐसे हैं कि अपनी जवान बहन को बीच चौराहे पर चुंबन करते हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप में से कौन हैं, जो अपनी जवान बहन-बेटी को बीच चौराहे पर चुंबन करता है। ये संस्कारों का अभाव है। ये संस्कार तो विदेशी संस्कृति के हैं।' गुरुवार को शाजापुर में दिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान पर बवाल मचा तो उन्होंने कहा- मैं भी अपनी बहन का सिर चूमता हूं। मैं रिश्ते की पवित्रता पर सवाल नहीं उठा रहा। मैंने भारतीय संस्कृति और विदेशी संस्कृति की बात की है। मंत्री विजय शाह ने विजयवर्गीय के बयान का समर्थन किया है। खंडवा में उन्होंने बगल में बैठी विधायक कंचन तनवे की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये मेरी सगी बहन भी हैं तो क्या मैं सार्वजनिक रूप से चुंबन लूंगा। यह हिंदुस्तानी संस्कृति और सभ्यता नहीं सिखाती है। इधर, कांग्रेस ने विजयवर्गीय के इस बयान के खिलाफ उनके बंगले पर प्रदर्शन की बात कही है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने खरगोन में कहा- कैलाश विजयवर्गीय ने जिस तरह की घृणित टिप्पणी की है। ये भारत की संस्कृति, परंपरा और भाई बहन के रिश्ते को चुनौती दी है। विकृत मानसिकता के मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए। मैंने विदेशी और भारतीय संस्कृति की बात कही
अपने बयान पर शुक्रवार को भोपाल में मंत्री विजयवर्गीय ने कहा- मैं किसी रिश्ते की पवित्रता पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगा रहा हूं। भारतीय संस्कृति में सभी रिश्ते पवित्र हैं। लेकिन रिश्तों की एक मर्यादा है, मैं उसकी बात कर रहा हूं। मैंने जो कहा वो ये बात है कि विदेशों में ये चलता है। हमारे यहां इस तरह की संस्कृति नहीं हैं। विजयवर्गीय ने पूछा- आप भी पत्रकार हैं। आप अपनी बहन को बीच चौराहे पर आलिंगन करते हैं क्या? हमारे संबंध प्रेम के संबंध हैं। मैं भी अपनी बहन का सिर चूमता हूं। मैं रिश्ते की पवित्रता पर प्रश्न चिन्ह नहीं उठा रहा हूं। मेरा पूरा भाषण सुनते तो यह प्रश्न ही नहीं उठता। मैंने भारतीय संस्कृति और विदेशी संस्कृति की बात की है। विजयवर्गीय ने कहा- मेरा भाषण टुकड़ों-टुकड़ों में लेकर कोई भी बात उठा लेंगे तो यह अच्छी पत्रकारिता नहीं हैं। मंत्री विजय शाह ने किया विजयवर्गीय का समर्थन
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा- ये मेरी (विधायक कंचन तनवे की तरफ इशारा करते हुए) सगी बहन भी हैं तो क्या मैं सार्वजनिक रूप से चुंबन लूंगा। यह हिंदुस्तानी संस्कृति और सभ्यता नहीं सिखाती है। मंत्री ने कहा- आप एक बार खुद ट्राय करके देख लिजिए। ये हमारी संस्कृति नहीं है, हमारी सभ्यता, रीति-रिवाज और परंपरा यह नहीं सिखाते हैं और जो सिखाते हैं, अपने घर में करें, चौराहे पर नहीं। सीएम नहीं बन पाए तो विजयवर्गीय पागल हो गए
कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने उनके इस्तीफे की मांग की है। पटवारी ने कहा- मैं भाजपा की कार्यकर्ता बहनों, नेताओं और देश-प्रदेश के नागरिकों से अनुरोध करता हूं कि ऐसी विकृत मानसिकता के व्यक्ति यदि सत्ता में बैठेंगे तो इस देश की संस्कृति और पारिवारिक पृष्ठभूमि की रक्षा कैसे होगी। कैलाश विजयवर्गीय ने जो टिप्पणी की वो राहुल गांधी पर नहीं बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति और सभ्यता पर टिप्पणी की है। जीतू पटवारी ने आगे कहा- कैलाश विजयवर्गीय को मुख्यमंत्री नहीं बनाया। इनको मुख्यमंत्री बनना है। 70 साल के बुजुर्ग हो गए हैं। मतलब कैलाश विजयवर्गीय बूढ़े हो गए हैं। अभी मुख्यमंत्री नहीं बने तो पागल हो गए हैं। वो पगलाहट में ऐसी बातें कर रहे हैं। कैलाश विजयवर्गीय को माता रानी सदबुद्धि दें। कैलाश विजयवर्गीय ने शाजापुर में ये बयान दिया था
गुरुवार को शाजापुर में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने कहा- 'हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं। हमारी बहनों के गांव जीरापुर में पानी तक नहीं पीते हैं। मेरे पिताजी घर से पानी का लोटा लेकर आते थे। आज के हमारे प्रतिपक्ष के नेता ऐसे हैं कि अपनी जवान बहन को बीच चौराहे पर चुंबन करते हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप में से कौन हैं, जो अपनी जवान बहन-बेटी को बीच चौराहे पर चुंबन करता है। ये संस्कारों का अभाव है। ये संस्कार तो विदेशी संस्कृति के हैं। इसमें उनकी गलती नहीं है। वह विदेश में पले-बढ़े हैं। ऐसे संस्कार का अनुभव है। वह प्रधानमंत्री को भी तू तड़ाक करके बात करते हैं।' देखिए राहुल और बहन प्रियंका की दो तस्वीरें... विजयवर्गीय बोले- हम बहन के घर का पानी तक नहीं पीते
मध्य प्रदेश के नगरीय एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं। हमारी बहनों के गांव जीरापुर में पानी तक नहीं पीते हैं। मेरे पिताजी घर से पानी का लोटा लेकर आते थे। ये खबर भी पढ़ें..
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